घोषणा पत्र

 

1. हम कौन से कानूनों की मांग करते हैं जिन्हें सरकारी आदेश द्वारा पास करवाने की कोशिश करेंगे

 

हम नागरिकों के दुःख-दर्द दूर करने के लिए नीचे दिए गए कानून सरकारी आदेश द्वारा लागू करवाने का प्रयत्न करेंगे -

1) राईट टू रिकॉल जिला राशन अधिकारी आम जनता अपने जिला के राशन अधिकारी को किसी भी दिन बदल सकेगी यदि वो
सही तरीके से काम नहीं कर रहा है |
* इसके अलावा हर नागरिक को अपने राशन की दूकान किसी भी दिन बदलने का अधिकार होगा | जब आप नागरिक के पास
ये सत्ता आ जायेगी, तो दुकानदार खुद घर आकार
10 लीटर केरोसीन दे जायेगा | आपको घंटो लाइन में खड़ा होकर सिर्फ 7
लीटर केरोसीन मिलता है , ये समस्या हल हो जायेगी |
*
3,5 किलो का गैस सिलेंडर निकलवाएँगे ताकि किसी गरीब के पास 400 रुपये नहीं भी हों तो भी वो गैस खरीद सके |
2) राईट टू रिकॉल - जिला शिक्षा अधिकारी आम जनता अपने जिले के शिक्षा अधिकारी को बदल सकेगी किसी भी दिन यदि
वो सही तरीके से काम नहीं कर रहा है जिससे शिक्षा में सुधार होगा |
3) राईट टू रिकॉल - जिला पोलिस कमिश्नर आम जनता अपने जिले के पोलिस कमिश्नर को बदल सकेगी किसी भी दिन यदि
वो सही तरीके से काम नहीं कर रहा है , जिससे क़ानून व्यवस्था में सुधार होगा |
4) राईट टू रिकॉल - पार्षद आम जनता अपने जिले के पार्षद को बदल सकेगी किसी भी दिन यदि वो सही तरीके से काम
नहीं कर रहा है |
5) पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली आम जनता अपनी शिकयत या प्रस्ताव या सुझाव एस.डी.एम के दफ्तर जाकर प्रधानमंत्री
के वेबसाइट पर रखवा सकेगा , ताकि शिकयत / प्रस्ताव का हर एक शब्द कंप्यूटर पर आ जायेगा और हर एक शब्द लाखों
लोग देख सकेंगे | यदि कोई अफसर शिकायत का एक शब्द भी बदलने की कोशिश करेगा तो , उसकी पोल लाखों-करोड़ों
लोगों के सामने खुल जायेगी , इसीलिए वो ऐसा नहीं करेगा |
यदि कोई नागरिक चाहे तो पहले से दर्ज अर्जी पर अपनी हाँ/ना प्रधानमंत्री के वेबसाइट पर दर्ज करवा सकेगा , एस.डी.एम.

के दफ्तर जा कर |

* ये पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली (सिस्टम) ये पक्का करेगा कि नागरिकों की शिकायत / प्रस्ताव हमेशा देखी जा
सकती है और जाँची जा सकती है कभी भी ,कहीं भी, किसी के भी द्वारा ताकि शिकायत को कोई नेत्ता, कोई बाबू (लोकपाल
आदि) ,कोई जज या मीडिया न दबा सके
|
6) सेना और नागरिकों के लिए खनिज आमदनी आज पब्लिक के जमीन और खदानों से होने वाली आमदनी को भ्रष्ट सरकारी
अफसर खा जाते हैं | इस क़ानून पर यदि प्रधानमंत्री यदि हस्ताक्षर कर दे , तो हरेक नागरिक को हर महीने, उनके हक का
300-400 रुपये उनके खाते में सीधा जमा होगा और जनता की गरीबी दूर हो जायेगी कुछ ही महीनों में |

2. राईट टू रिकॉल (बदलने का अधिकार ) क्या है ?


महात्मा सचिंद्रनाथ सान्याल (महात्मा भगत सिंह के गुरु) और महात्मा चंद्र शेखर आज़ाद ने 1925 में कहा था कि हम जिस भारत की स्थापना करना चाहते हैं उसमें नागरिकों के पास राईट टू रिकॉल (अपने नेता या अधिकारी को बदलने का अधिकार) होगा | क्योंकि यदि ऐसा अधिकार नहीं हुआ तो चुनाव बेकार है और लोकतंत्र एक मजाक बन जायेगा |

ये ही बात स्वामी दयानंद सरस्वतीजी ने अपनी पुस्तक `सत्यार्थ-प्रकाश` के छटवें अध्याय में लिखा है कि `राजा प्रजा अधीन होना चाहिए | यदि राजा प्रजा अधीन नहीं हुआ तो राजा प्रजा को अन्यायपूर्ण तरीके से लूटेगा और दंड देगा | स्वतंत्र राजा प्रजा का उसी प्रकार नाश करेगा जिस प्रकार माँसाहारी पशु अन्य पशुओं को खा जाता है | और ये श्लोक उन्होंने वेदों से लिए हैं | `राजा` का मतलब यहाँ राजवर्ग है, जो शाशन-प्रशाशन करता है , जिसमें आज के नेता,जज और अफसर आ जाते हैं | और `अधीन` शब्द का मतलब है कि प्रजा राजवर्ग को हटा सके,बदल सके या सज़ा भी दे सके | ऐसा `प्रजा-अधीन राजा` की प्रक्रिया हमारे देश में कई हज़ार साल पहले थी लेकिन जब से वो व्यवस्था समाप्त हुई, तबसे हमारा पतन होना शुरू हो गया | और आज ये प्रक्रियाएँ पश्चिम के देशों में है, जिसके कारण वहाँ भ्रष्टाचार और गरीबी कम है और लोग पड़े-लिखे हैं |
राईट टू रिकॉल या बदलने का अधिकार का मतलब है कि यदि मतदाताओं का बहुमत यदि बोले कि उनका अधिकारी या नेता सही से काम नहीं कर रहा है है तो मतदाता किसी भी दिन उनको बदल सकते हैं |
ये क़ानून आने से अधिकारी के सर पर लटकती तलवार होगी कि यदि अफसर ने सही से काम नहीं किया , तो उसकी नौकरी किसी भी दिन जा सकती है , इसीलिए वो अधिकारी चुस्ती से काम करेगा | ये क़ानून आने से 50 प्रतिशत अधिकारी दो दिन में सुधर जायेंगे और 1-2 अधिकारियों की नौकरी जाने से बाकी के अधिकारी भी सुधर जायेंगे और इमानदारी से अपना काम करेंगे |

3. दूसरे देशों में पोलिस , जज, अधिकारियों में भ्रष्टाचार कम होने का क्या कारण है ?


दूसरे देशों में ट्रैफिक का नियम तोड़ने पर पोलिस इन्स्पेक्टर आपसे रिश्वत नहीं लेगा , या तो चेतावनी देकर छोड़ देता है या तो पर्ची काट देता है | वो ऐसा इसीलिए करता है क्योंकि वहाँ ट्रैफिक के नियम तोड़ने वाले सौ आदमियों में से एक आदमी कमिश्नर का होता है , और इसी कारण इन्स्पेक्टर को डर होता है कि यदि वो रिश्वत लेगा , तो कमिश्नर उसे नौकरी से निकाल देगा | तो क्या वहाँ का कमिश्नर बहुत सज्जन आदमी है कि ऐसा करता है ? नहीं, वहाँ के कमिश्नर ऐसा इसीलिए करता है क्योंकि यदि वो क़ानून-व्यवस्था नहीं बना कर रखेगा , तो वहाँ के मतदाताओं को कमिश्नर को नौकरी से निकालने का अधिकार है ,किसी भी दिन | यानी राईट टू रिकॉलपोलिस कमिश्नर है |

इसी तरह दूसरे देशों में मतदाताओं के पास अपने राशन अधिकारी , शिक्षा अधिकारी , पार्षद , मेयेर , जज , मुख्यमंत्री , आदि अधिकारियों को किसी भी दिन निकालने / बदलने का अधिकार है और नौकरी जाने के डर से वे सही तरीके से काम करते हैं | यानी वहाँ राईट टू रिकॉल-राशन अधिकारी, राईट टू रिकॉल-शिक्षा अधिकारी, राईट टू रिकॉल-पार्षद , राईट टू रिकॉल-जज , राईट टू रिकॉल-मुख्यमंत्री आदि है |

 

4. प्रजा अधीन राशन अधिकारी या राईट टू रिकॉल - राशन अधिकारी के बारे में और जानकारी


एस.डी.एम. के दफ्तर जाकर कोई भी नागरिक अपने आप को उम्मीदवार दर्ज करवा सकेगा चुनाव जितनी फ़ीस देकर | और कोई भी नागरिक , एस.डी.एम. के क्लर्क के यहाँ जा कर , अपना वोटर कार्ड दिखाकर , ज्यादा से ज्यादा पसंद के पांच दर्ज उम्मीदवारों का समर्थन कर सकता है, क्लर्क को तीन रुपये देकर | कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपना समर्थन रद्द कर सकता है , जिससे इस प्रक्रिया / तरीके को पैसों से , गुंडों से या मीडिया से नहीं प्रभावित किया जा सकेगा | ऐसे क़ानून को पारित करने के लिए हम प्रयास करेंगे |

5. प्रजा अधीन पार्षद या राईट टू रिकॉल - पार्षद के बारे में और जानकारी


1. एस.डी.एम. के दफ्तर जाकर कोई भी नागरिक अपने आप को पार्षद उम्मीदवार दर्ज करवा सकेगा चुनाव
जितनी फ़ीस देकर |

2.
कोई भी नागरिक , एस.डी.एम. के क्लर्क के यहाँ जाकर , अपना वोटर कार्ड दिखाकर , ज्यादा से ज्यादा
पसंद के पांच दर्ज उम्मीदवारों का समर्थन कर सकता है, क्लर्क को तीन रुपये देकर |

3.
कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपना समर्थन रद्द कर सकता है , जिससे इस प्रक्रिया / तरीके को पैसों से
, गुंडों से या मीडिया से नहीं प्रभावित किया जा सकेगा |

4.
यदि कोई भी उम्मीदवार के उस चुनाव-क्षेत्र के सभी मतदाताओं के 35 % से ज्यादा अनुमोदन / स्वीकृति हों , और साथ ही
में वर्त्तमान पार्षद के प्राप्त वोटों से 1% अनुमोदन / स्वीकृति ज्यादा हों, तो वर्त्तमान पार्षद अपना इस्तीफा 7 दिन में दे सकता
है या दूसरे पार्षद उस पार्षद को निकालने का प्रस्ताव रख सकते हैं | पार्षदों का निर्णय अंतिम होगा |
5. यदि पार्षद इस्तीफा देता है या निकाला जाता है, तो राज्य चुनाव आयोग नया चुनाव करवायेगी , कायदे के
अनुसार |

6. प्रजा अधीन जिला शिक्षा अधिकारी या राईट टू रिकॉल - जिला शिक्षा अधिकारी के बारे में और जानकारी


1.
एस.डी.एम. शब्‍द का अर्थ होगा इस सरकारी आदेश का पालन करने के लिए एस.डी.एम. अथवा उसके
द्वारा `रखा गया कोई अधिकारी।

`जिला शिक्षा अधिकारी` का मतलब उस पूरे जिला की शिक्षा सम्बन्धी निर्णय करने वाला और शिक्षा
सम्बन्धी अच्छी व्यवस्था बनवाये रखने वाला |

2. यदि भारत का कोई नागरिक जिला शिक्षा अधिकारी बनना चाहता है और वह एस.डी.एम. के पास जाकर , सांसद के चुनाव
जितनी फीस जमा करने पर , `जिला शिक्षा अधिकारी` का उम्मीदवार बन सकता है |
3. कोई भी नागरिक एस.डी.एम. के कार्यालय जाकर 3 रूपए का शुल्‍क देकर अधिक से अधिक 5 व्‍यक्‍तियों को जिला शिक्षा
अधिकारी के पद के लिए स्वीकृत / अनुमोदित कर सकता है | एस.डी.एम. का क्लर्क उसके अनुमोदनों को कम्‍प्‍यूटर में दर्ज
करेगा और उसकी एक रसीद देगा जिसमें उसकी वोटर कार्ड (मतदान पहचान-पत्र) संख्‍या, तारीख / दिन और उसके द्वारा
अनुमोदित किए गए व्‍यक्‍तियों (के नाम) होंगे।
4.
एस.डी.एम. का क्लर्क नागरिक के अनुमोदन को उसके वोटर कार्ड संख्या के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डालेगा।
5.
यदि कोई व्‍यक्‍ति अपना अनुमोदन / पसंद रद्द करवाने के लिए आता है तो एस.डी.एम. बिना कोई शुल्‍क लिए रद्द कर देगा।
6.
एस.डी.एम. या उसके द्वारा रखा गया अधिकारी प्रत्‍येक उम्‍मीदवार को मिले स्वीकृति की गिनती वेबसाइट पर रखेगा ।
7.
यदि किसी उम्‍मीदवार को किसी जिले में सभी नागरिक (सभी, न कि केवल उनका जिन्‍होंने अपना अनुमोदन दर्ज करवाया है)
के 35 प्रतिशत से अधिक नागरिकों का अनुमोदन है, तो मुख्‍यमंत्री उसे `जिला शिक्षा अधिकारी` की नौकरी दे सकता है
8.
कोई भी व्‍यक्‍ति नागरिक का अनुमोदन प्राप्‍त करके जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है, वह एक से अधिक जिले का भी
जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्‍य में अधिक से अधिक 5 जिलों का और भारत भर में अधिक से अधिक
20 जिलों का जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्‍यक्‍ति अपने जीवन काल में किसी जिले का जिला शिक्षा अधिकारी
8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिले का जिला शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन
सभी जिलोंके जिला शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता (महंगाई के लिए ज्यादा पैसा), बोनस आदि मिलेगा।

यदि कुछ लाख लोग भी अपना महीने का 10 घंटा दें इन जन-हित के प्रक्रियाओं को बताने के लिए , तो कुछ ही महीनों में , ये पूरे देश-वासियों को पता चल जायेगा | पता चलने पर करोड़ों लोग इसकी मांग करेंगे और प्रधान-मंत्री को इन जन-हित की प्रक्रियाओं पर हस्ताक्षर करना पड़ेगा |