प्रजा अधीन राजा/राईट टू रिकाल समूह (अपंजीकृत) के प्रस्ताव,श्री राजीव दीक्षित जी द्वारा समर्थित

तीन लाइन का क़ानून गरीबी और भ्रष्टाचार कम कर सकता है कुछ ही महीनों में

पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली!!

 

जब सत्ता कुछ ही लोगों के पास होती है तो समाज में भ्रष्टाचार होता है. इसीलिए सत्ता हर एक जन के पास होनी चाहिए.सत्ता जानने की, सत्ता बताने की और सत्ता निर्णय लेने की.

 

एक तीन लाइन के क़ानून पारित होने से ये संभव है कुछ ही महीनों में.

 

कृपया इस जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली को समर्थन करें और मांग करें |

ये क़ानून-ड्राफ्ट किसने लिखे ?

सभी बंधू जन,

यदि कोई आप से प्रश्न पूछे ---- किसने प्रस्तावित सरकारी राजपत्र अधिसूचना क़ानून-ड्राफ्ट लिखा है जैसे `जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली`, प्रजा अधीन राजा/राईट टू रिकाल(भ्रष्ट को बदलने का अधिकार) प्रधान मंत्री , प्रजा अधीन लोकपाल, प्रजा अधीन सुप्रीम कोर्ट-मुख्य जज ,प्रजा अधीन रिसर्व बैंक गवर्नर , नागरिकों और सेना के लिए खनिज रोयल्टी (आमदनी)(एम.आर.सी.एम),प्रजा अधीन न्यायतंत्र (जूरी सिस्टम) आदि, कृपया जोर से बोलें कि आप ने स्वयं लिखा है|

उदहारण के लिए,एक कलम और कागज़ लें और उसपर `जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली` का तीन लाइन का क़ानून-ड्राफ्ट लिखें एक पन्ने पर और फिर यदि आप कहते हैं कि आपने स्वयं `जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली` लिखा है , तो ये तथ्य और कानूनी रूप से सही है क्योंकि `जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली ` क़ानून-ड्राफ्ट में केवल कॉपी-लेफ्ट है कॉपी-राईट नहीं |

और ये नैतिक रूप से भी सही है, क्योंकि सभी मालिक हैं गैर-कॉपी-राईट सामग्री का, जब तक वे चाहें मालिक होना | और यदि ओई पूछता है किसने ये क़ानून-ड्राफ्ट पहले लिखे हैं, तो बताएं कि प्रजा अधीन राजा अथर्ववेद में दिया है, और इसीलिए श्री सूर्य ने पहली बार लिखा था कोई ८० लाख वर्ष पूर्व | और श्री सूर्य को भी कोई कॉपी-राईट नहीं चाहिए |

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अनुवादक- श्री नीरज श्रीवास्तव

प्रूफ-संशोधन अनिल, हर्षित, अनुभव, मंज़ूर भाई, महेश कुमार ,सुमित वर्मा, अलोक वर्मा, महेंदर सिंह, सुरेंदर और अन्य |

 

 

हम कोई राजनैतिक पार्टी नहीं हैं `पार्टी` शब्द समूह के अर्थ में भी प्रयोग हो सकता है कुछ सन्दर्भ में | हम अपंजीकृत समूह हैं ,ये सरकारी अधिसूचना को पारित करने की मांग कर रहे हैं

(1)`जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकयात/प्रस्ताव प्रणाली`

(2)`नागरिक और सेना के लिए खनिक रोयल्टी (आमदनी)` (एम.आर.सी.एम)

(3) प्रजा अधीन राजा (भ्रष्ट को बदलने का नागरिकों का अधिकार) सभी मुख्य पदों पर

(4) प्रजा अधीन न्यायतंत्र (जूरी सिस्टम) न्यायालय/कोर्ट में

 

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हमारा मुख्य प्रस्ताव `जनता की आवाज़` पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली है |(पहला अध्याय देखें) इसी के द्वारा अन्य प्रस्ताव आयेंगे कुछ ही महीनों में |अन्य प्रस्ताव की बाराकियों या पुरे प्रस्ताव से पाठक असहमत भी हो सकते हैं| क्योंकि एक बार `जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली`सरकारी अधिसूचना पारित होने पर जनता निर्णय करेगी कि इस पुस्तक में अन्य प्रस्ताव पारित होने चाहिए के नहीं या कोई इनसे भी अच्छे प्रस्ताव जनता द्वारा पारित किये जाएँ |हम ये जनहित के क़ानून करोड़ों आम-नागरिकों के समर्थन द्वारा लाना चाहते हैं |

कॉपी-लेफ्ट

मैं इस पुस्तक कि कॉपी-राईट(copyright) केवल इतना सुनिश्चित करने के लिए कर रहा हूँ कि कोई भी अन्य व्यक्ति इसकी सामग्री की कॉपी-राईट ना कर सके और इसके वितरण पर नियंत्रण न कर सके| ये कॉपी-राईट किसी को पर्चे,आदि कॉपी बनाने और वितरण करने में बाध्य नहीं है| कोई भी भी इस पुस्तक या इसके अंश की प्रतियां/कापियां बनाने के लिए स्वतंत्र है, और वितरण करने मुक्तरूप से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या किसी भी रूप में बिना हमारे नाम दिए| कोई भी इस पुस्तक या अंश को अनुवाद करने के लिए स्वतंत्र है किसी भी भाषा में | कोई अनुमति या भुगतान की आवश्यकता नहीं है या अपेक्षा भी है|

 

------ प्रजा अधीन राजा समूह (राईट टू रिकाल ग्रुप), लेखक

 

 

 

 

 

 

 

राजीव दीक्षित जी ने राईट टू रिकाल (भ्रष्ट को बदलने की प्रणाली) का समर्थन किया है (समर्थित यू-ट्यूब विडियो) -

http://www.youtube.com/watch?v=pL-DoRQmcl0

http://www.youtube.com/watch?v=EywTrIr3-M

 

 

प्रिय पाठकगण,

 

मैंने इस पुस्तक को पंक्तिरूप (linear fashion) में लिखने का प्रयास किया है | यदि पाठक ये चाहता है कि वो केवल `` पन्ने पढे, तो वो केवल पहले `` पन्ने पढना पर्याप्त होगा | सामान्य रूप से , अधिकतर महतवपूर्ण विषय पहले रखे गए हैं और पहले कुछ पन्नों को समझने के लिए बाद के पन्नों में क्या लिखा है , ये जानना आवश्यक नहीं है | यदि आप (पाठक) का कोई प्रश्न है किसी भी लाइन पर इस पुस्तक में, तो कृपया बिना संकोच के , जरुर www.forum.righttorecall.info पर अपना प्रश्न डालें |

 

ये पुस्तक इतनी बड़ी क्यों है ?

 

दखिए , हमें कार्यकर्ताओं की जरूरत है, जो की इन जन-हित के क़ानून-ड्राफ्ट को जन-जन तक पहुंचा सकें, ताकि जन-जन इसकी मांग करे और ये क़ानून हमारे देश में लागू हो सकें | और ज्यादातर कार्यकर्ताओं के पसंदीदा/पसंद के मुद्दे/विषय होते हैं | उदाहरण, कुछ कार्यकर्त्ता , शिक्षा को जरुरी मुद्दा समझते हैं , कुछ भ्रष्टाचार को सबसे जरूरी मुद्दा समझते हैं, कुछ गो-हत्या, आदि| यदि उनका पसंद का मुद्दा गायब हो, तो ये पुस्तक उनके लिए बेकार होगी |

 

अब मैं सबसे अधिक कार्यकर्ताओं को ये दिखाना चाहता हूँ कि उनका उनका पसंद का मुद्दा/विषय को प्रस्तावित `प्रजा अधीन-राजा`, `पारदर्शी शिकायत प्रणाली(सिस्टम), आदि क़ानून-ड्राफ्ट से फायदा होगा और इनके द्वारा आसानी से लागू किये जा सकते हैं | और इसके लिए मुझे सभी पसंदीदा मुद्दे की बात करनी पड़ी | इसीलिए मैंने क़ानून-ड्राफ्ट या कानूनों का सारांश (छोटे में) लिखा भारत की 80 के करीब बड़ी समस्याएं को हल करने के लिए , कार्यकर्ताओं की आशाओं को पूरा करने के लिए |

इसीलिए ये पुस्तक इतनी लंबी हो गयी है |

और मैंने बड़े अक्षर इस्तेमाल किये हैं और अधिक अंतर रखा है वाक्यों के बीच , ताकि बुजर्ग लोग भी आसानी से ये पढ़ सकें |

लेकिन आपको सारे पन्ने पढ़ने की जरूरत नहीं है| केवल पहला अध्याय पढ़ें और फिर अपने पसंद के विषय/मुद्दा जैसा सेना और देश की सुरक्षा , शिक्षा, स्वदेशी, कोर्ट , पोलिस आदि में भ्रष्टाचार कैसे कम करना, या गौ-रक्षा आदि, पर जा सकते हैं , विषय सूची पर एक नजर देखकर |

 

 

इस किताब/पुस्‍तक के लगबग प्रत्‍येक पाठ में यह बताने के लिए समीक्षा प्रश्‍न हैं कि उनका उत्‍तर देकर पाठक अपने आप को संतुष्‍ट कर सकता है कि उसने इस पाठ को पढ़ लिया है और प्रत्‍येक पाठ में पाठक के लिए कुछ अभ्‍यास-प्रश्‍न हैं ताकि वह भारतीय प्रशासन से परिचित हो सके।

 

भारत में , हमें आदत है अच्छे लोगों का इंतज़ार करने की ,कि वे सत्ता में आयें और भारत को सुधारने और गरीबी और भ्रष्टाचार को समाप्त करेंगे | इस के बदले हम नागरिकों को सत्ता अपने हाथ में लेने चाहिए मंत्रियों और न्यायाधीशों/जजों से|हम प्रजा अधीन राजा(भ्रष्ट को बदलने का नागरिकों का अधिकार) और जूरी सिस्टम (भ्रष्ट को सज़ा देने का नागरिकों का अधिकार) की मांग कर सकते हैं और सत्ता अपने हाथों में ले सकते हैं |ये केवल मूर्खता है अच्छे नेता और न्यायाधीस/जज के लिए सत्ता में आने का इन्तेज़ार करना | कहानी की सीख ये है की भारतीय नागरिक इतने सौभाग्यशाली नहीं हैं कि उन्हें पिछले 65 वर्षों में कोई अच्छा नेता मिला हो |

 

 

 

 

 

 

 

 

यह किताब हर ३-४ महीनो में अपडेट होती रहती है और इसकी कॉपी इन्टरनेट

पर मुफ्त है आप इसको नीचे दी गई लिंक पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं | तो कृपया आपसे विनती है कि इसे हर ३-४ महीने के बाद अपडेट करते रहें-

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विषय - सूची

परिभाषाएं.. 29

कुछ महत्वपूर्ण सूत्र.. 32

अध्याय 1 - तीन लाइन का यह प्रस्‍तावित कानून गरीबी और पुलिस में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार को केवल चार महीनों में ही कम कर सकता है. 53

(1.1) क्या यह मजाक है? 53

(1.2) राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रस्‍तावित `जनता की आवाज- पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)` - सरकारी अधिसूचना का प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट... 57

(1.3) क्या भारत में सभी नागरिकों के पास इस कानून का उपयोग करने के लिए इन्टरनेट है? और अन्य प्रश्न 59

(1.4) जनता की आवाज (सूचना का अधिकार-2)` का एक लाइन में सार 60

(1.5) जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)` के खण्‍ड 1 के बारे में कुछ और बातें 61

(1.6) ये तीन लाइन का सरकारी आदेश आम जनता को पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव/सुझाव डालने का अधिकार देगा 61

(1.7) तो कैसे जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)` गरीबी को 3-4 महीने में कम कर देगा? 64

(1.8) करोड़ों नागरिकों को यह कैसे पता चलेगा कि नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्‍टी (MRCM) शपथपत्र/एफिडेविट प्रस्‍तुत हो गया है? 67

(1.9) जनता की आवाज (सूचना का अधिकार-2) कानून पुलिस में भ्रष्टाचार को कम कैसे करेगा? 68

(1.10) राज्‍य स्‍तर के जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)` प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट पर हस्‍ताक्षर करने की मांग मुख्‍यमंत्री से करना.. 70

(1.11) शहर के महापौर/मेयर से नगर स्‍तरीय जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)` प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट पर हस्‍ताक्षर करने की मांग करना.. 72

(1.12) जिला पंचायत स्‍तर पर जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)` का प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट 73

(1.13) जनहित याचिका/पी आई एल के माध्‍यम से `जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) लाना 75

(1.14) उन नेताओं, बुद्धिजीवियों की निंदा कैसे करें जो जनता की आवाज का विरोध करते हैं 76

(1.15) जनता की आवाज (सूचना का अधिकार 2) को लाने में आप कैसे मदद कर सकते हैं 78

(1.16) किसी ने इस बारे में पहले क्‍यों नहीं सोचा ? 78

(1.17) कैसे जनता की आवाज (सूचना का अधिकार 2) राजनैतिक अंकगणित का शून्‍य है ? 78

(1.18) सारांश. 79

अध्याय 2 - अमेरिकी पुलिस में भारतीय पोलिस से भ्रष्टाचार कम क्यों है?. 80

(2.1) यह बहुत ही रहस्य भरा प्रश्न है पर इसका उत्तर बहुत ही आसान है!! 80

(2.2) राइट टू रिकॉल ( भ्रष्ट को नागरिकों द्वारा निकालने/बदलने का अधिकार) और प्रजा अधीन राजा 83

(2.3) प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल आधुनिक अमेरिका में. 84

(2.4) भारत में प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल का संक्षिप्त इतिहास. 89

(2.5) पूरे विश्व में प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल का संक्षिप्त इतिहास. 90

(2.6) आधुनिक भारत में राइट टू रिकॉल. 95

(2.7) भारत में राइट टू रिकॉल/प्रजा अधीन-राजा प्रणाली(सिस्टम) की संवैधानिक वैधता.. 98

(2.8) क्या आधुनिक अमेरिका में राइट टू रिकॉल/भ्रष्ट को नागरिकों द्वारा बदलने का अधिकार अथर्ववेद से आया ? 99

(2.9) राइट टू रिकॉल की मेरी खोज और अथर्ववेद (सत्यार्थ प्रकाश) 99

अध्याय 3 - `जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत प्रणाली(सिस्टम)` पर कुछ और बातें.. 101

(3.1) `जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत प्रणाली(सिस्टम)` में बाद में जोड़े गए अंश जो इसे सुरक्षित बनाते हैं 101

(3.2) क्‍या नागरिक हजारों बार केवल हां-नहीं ही दर्ज करवाते रहेंगे? 102

(3.3) क्‍यों प्रमुख बुद्धिजीवी इस `जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) - सरकारी अधिसूचना / आदेश की मांग का विरोध करते हैं? 103

(3.4) नागरिकों से हमारा अनुरोध. 105

(3.5) `जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)` और नौकरियों में आरक्षण. 107

(3.6) क्यों हम पहले कदम के रूप में `जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)` जैसे छोटे परिवर्तन की मांग कर रहे हैं? 107

(3.7) क्‍या अमीर लोग हमारे नागरिकों को खरीदने में सफल नहीं हो जाएंगे? 108

(3.8) भारत के अमीर वर्ग की गलतफहमी से उनके जनसाधारण-समर्थक कानूनों का विरोध. 110

अध्याय 4 - प्रधानमंत्री,मुख्‍यमंत्री,महापौर/मेयर,सरपंच, हाई कोर्ट के जज को पत्र.. 114

(4.1) प्रधानमंत्री को पत्र 114

(4.2) मुख्‍यमंत्री को पत्र 116

(4.3) महापौर/मेयर को पत्र 117

(4.4) जिला पंचायत अध्‍यक्ष को पत्र 119

(4.5) हाई कोर्ट के जजों को पत्र 121

(4.6) क्‍या करें जब प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्रीगण, महापौर/मेयर आदि इस सरकारी आदेश को मानने से इनकार कर दें 123

(4.7) बुद्धिजीवियों से इन पत्रों पर हस्‍ताक्षर करने के लिए कहना.. 123

अध्याय 5 - प्रजा अधीन राजा समूह का दूसरा प्रस्ताव नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी 123

(5.1) मात्र 3 लाइन का यह जनता की आवाज (सूचना का अधिकार-2) पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली गरीबी को 4 महीने में ही कैसे कम कर सकता है? 123

(5.2) नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट - संक्षेप में 125

(5.3) नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्‍टी (एम आर सी एम) का विस्‍तृत क़ानून-ड्राफ्ट / प्रारूप 126

(5.4) खनिज रॉयल्‍टी भेजना.. 131

(5.5) राज्‍य स्‍तर पर नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्टी (एम आर सी एम) क़ानून-ड्राफ्ट / प्रारूप 131

(5.6) सार्वजनिक भूमि का किराया कितना है ? 131

(5.7) खनिज रॉयल्‍टी कितनी है ? 133

(5.8) जमीन का किराया वसूलने / जमा करने के प्रभाव 135

(5.9) जमीन का किराया जमा ना करने/ न वसूलने का (कु)प्रभाव - 136

(5.10) राष्‍ट्रीय भूमि किराया अधिकारी (एम एल आर ओ) को हटाने / वापस बुलाने का तरीका 137

(5.11) `नागरिकों और सेना के लिए खनिज रॉयल्‍टी` (एम आर सी एम) कानून का प्रस्‍तावित क़ानून-ड्राफ्ट /प्रारूप 137

(5.12) कृपया सेना और नागरिक के लिए खनिज रायलटी (एम.आर.सी.एम) कानून, जिसका प्रस्‍ताव मैंने किया है, उसके अंतिम दो खंड/कलम पर ध्‍यान दें 145

(5.13) 110 करोड़ नागरिकों को भुगतान भेजने में आनेवाली लागत. 146

(5.14) क्या इससे सरकारी आय कम नहीं होगी ? नहीं। 148

(5.15) पश्‍चिम में कोई ऐसा कानून नहीं है तो हमें इसकी जरूरत क्‍यों है? 150

(5.16) `नागरिक और सेना के लिए रोयल्टी (आमदनी)`(एम.आर.सी.एम) क़ानून-ड्राफ्ट और मानवाधिकार 150

अध्याय 6 - आर.आर.जी (प्रजा अधीन समूह) समूह की तीसरी मांग प्रजा अधीन प्रधान मंत्री, मुख्‍यमंत्री का ड्रॉफ्ट 152

(6.1) तीन लाइन का यह कानून प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री, जजों और पुलिस प्रमुखों में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार को केवल चार महीनों में ही कैसे कम कर सकता है ? 152

(6.2) प्रधानमंत्री को हटाने / बदलने के क़ानून-ड्राफ्ट का विवरण. 154

(6.3) प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्रियों को बदलने के लिए प्रस्‍तावित प्रक्रिया/तरीका का उदाहरण. 155

(6.4) मुख्‍यमंत्री को हटाने/बदलने के क़ानून-ड्राफ्ट का विवरण. 155

(6.5) क्‍या प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री हर सप्‍ताह बदले जाएंगे? नहीं। 157

(6.6) प्रधानमंत्री को बदलने/ राइट टू रिकॉल प्रधानमंत्री का प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट... 158

(6.7) क्या होगा यदि प्रधानमंत्री और सांसद जनता का कहा नहीं मानें? 161

(6.8) कृपया प्रजा अधीन प्रधान मंत्री (भ्रष्ट प्रधानमन्त्री को बदलने) के कानून, जिसका प्रस्‍ताव मैंने किया है, उसके अंतिम दो खंड पर ध्‍यान दें 161

(6.9) राइट टू रिकॉल/प्रजा अधीन-मुख्‍यमंत्री का क़ानून-ड्रॉफ्ट... 163

(6.10) तब क्‍या होगा जब मुख्‍यमंत्री, विधायक नागरिकों की बात न मानें? 165

(6.11) राइट टू रिकॉल / प्रजा अधीन नगर महापौर का क़ानून-ड्रॉफ्ट/प्रारूप 165

(6.12) प्रजा अधीन-सांसद क़ानून-ड्राफ्ट ( भ्रष्ट सांसद को नागरिकों द्वारा बदलने का अधिकार ) 168

(6.13) केन्द्रीय/राज्य सरकारी-आदेश ड्राफ्ट प्रजा अधीन-विधायक के लिए (भ्रष्ट विधायक को नागरिकों द्वारा बदलने का अधिकार ) 172

(6.14) राज्य सरकारी-आदेश ड्राफ्ट प्रजा अधीन-पार्षद के लिए (भ्रष्ट पार्षद को नागरिकों द्वारा बदलने का अधिकार) 175

(6.15) राज्य सरकारी-आदेश ड्राफ्ट प्रजा अधीन-ग्राम सरपंच के लिए (भ्रष्ट ग्राम सरपंच को नागरिकों द्वारा बदलने का अधिकार ) 177

(6.16) उन लोगों के लिए जो प्रधानमंत्री मुख्‍यमंत्री महापौर पर राइट टू रिकॉल/प्रजा अधीन राजा का विरोध करते हैं। 179

(6.17) प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल (भ्रष्‍ट को बदलने का अधिकार) प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट का प्रभाव 179

(6.18) बदलने / हटाने की ये प्रक्रियाएं / तरीके भ्रष्‍टाचार को कैसे कम करती हैं ? 185

(6.19) प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल तथा व्‍यावहारिक ज्ञान / कॉमन सेन्स... 189

(6.20) प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल और अथर्ववेद , सत्यार्थ प्रकाश. 190

(6.21) पश्चिम के पास प्रजा अधीन राजा / राइट टू रिकॉलप्रधानमंत्री , प्रजा अधीन राजा / राइट टू रिकॉलसुप्रीम कोर्ट जज नहीं है , तो हमें इसकी क्या आवश्यकता है? 191

(6.22) प्रजा अधीन राजा / राइट टू रिकॉल के विरूद्ध दिए जाने वाले तर्कों का जवाब 194

(6.23) `प्रजा अधीन-राजा`/`राईट टू रिकाल`(भ्रष्ट को नागरिकों द्वारा बदलने का अधिकार) के विरोधी , नकली `प्रजा अधीन-राजा`-समर्थक के लक्षण / चिन्ह और चालें. 195

(6.24) कृपया प्रक्रियाओं और क़ानून-ड्राफ्ट / मसौदों पर ध्यान केंद्रित करें ना कि कानूनों के नाम या व्यक्तियों पर जिसने ये क़ानून-ड्राफ्ट बनाएँ हैं क्योंकि नाम धोखा दे सकते हैं 203

(6.25) प्रजा अधीन राजा (राईट टू रिकाल)/भ्रष्ट को बदलने की प्रक्रिया अगले जन्म में ! 204

अध्याय 7 - चौथा आर.आर.जी (प्रजा अधीन समूह) का प्रस्ताव प्रजा अधीन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश(प्रधान जज). 206

(7.1) `जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) द्वारा जजों का बदलने/हटाने का नागरिकों का अधिकार(राईट टू रिकाल जज/प्रजा अधीन-जज) 206

(7.2) आर.टी.आर- सुप्रीम कोर्ट- मुख्‍य न्यायाधीश(प्रजा अधीन सुप्रीम-कोर्ट प्रधान जज ) ड्रॉफ्ट की संवैधानिक प्रामाणिकता.. 207

(7.3) उस सरकारी अधिसूचना का क़ानून-ड्राफ्ट जिसके माध्‍यम से प्रजा अधीन सुप्रीम कोर्ट प्रधान जज (उच्‍चतम न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश) कानून बनेगा.. 208

(7.4) पश्चिमी देशों में ऐसा कोई कानून नहीं है, तो हमें इसकी जरूरत क्यों है ? 210

(7.5) राष्ट्रीय न्यायिक आयोग (एन.जे.सी.)-एक बेकार / अनुपयोगी विचार है 211

अध्याय 8 - प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल (भ्रष्‍ट को बदलने का अधिकार) समूह का पांचवां प्रस्‍ताव दलितों के हां द्वारा आरक्षण कम करना... 213

(8.1) अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्‍य पिछड़े वर्ग के गरीब लोगों के समर्थन से आरक्षण कम करना 213

(8.2) प्रस्‍तावित आर्थिक-विकल्प प्रणाली(सिस्टम) का विस्‍तृत ब्‍यौरा. 213

(8.3) क्‍यों उपर लिखित प्रस्‍तावित कानून को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्‍य पिछड़े वर्ग के लोगों की `हां` मिलेगी ? 214

(8.4) लागत. 215

अध्याय 9 - मूल्‍य नियंत्रण के लिए प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल समूह का प्रस्‍ताव : प्रजा अधीन - भारतीय रिजर्व बैंक (आर बी आई) के गवर्नर. 216

(9.1) भारतीय रिजर्व बैंक (आर बी आई) के गवर्नर की भूमिका.. 216

(9.2) प्रजा अधीन - भारतीय रिजर्व बैंक (आर बी आई) के गवर्नर 216

(9.3) प्रजा अधीन - भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नर (आर बी आई) के लिए सरकारी अधिसूचना का प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट 217

(9.4) इस प्रकार तीन लाइनों के इस कानून और भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नर (आर बी आई को बदलने/हटाने की प्रक्रिया से महंगाई पर लगाम लगेगी.. 219

अध्याय 10 - मेरे प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल (भ्रष्‍ट को बदलने का अधिकार) समूह का एक संक्षिप्‍त परिचय 221

(10.1) समूह का नाम. 221

(10.2) आर आर जी (राईट टू रिकाल/प्रजा अधीन राजा) समूह का सारांश और योजना.. 222

(10.3) आर आर जी / प्रजा अधीन राजा समूह और अन्‍य पार्टियों/ दलों के बीच मुख्‍य अंतर 223

(10.4) हिंसा, क्रान्‍ति आदि पर विश्‍व के विचार 225

(10.5) लोकतंत्र का धर्म और संविधान. 225

(10.6) आर आर जी समूह की अन्य पुस्‍तकें / लेख. 226

(10.7) संपर्क / इंटरनेट समुदाय आदि महत्‍वपूर्ण यू.आर.एल इस प्रकार हैं 227

अध्याय 11 - प्रजा अधीन राजा / राइट टू रिकॉल (भ्रष्‍ट को बदलने का अधिकार) समूह तथा सभी पार्टियों, प्रमुख बुद्धिजीवियों के बीच अंतर. 228

(11.1) हम अधिकांश दलों और अधिकांश बुद्धिजीवियों से पूरी तरह अलग हैं । मुख्‍य अंतर इस प्रकार है 228

(11.2) प्रचार के तरीकों में सबसे महत्‍वपूर्ण अंतर 233

(11.3) प्रस्‍तावित कानूनों के प्रारूपों / क़ानून-ड्राफ्टों का महत्‍व.. 234

(11.4) भारत के अधिकतर बुद्धिजीवी - विशिष्ट/उच्च वर्ग के एजेंट हैं 235

(11.5) समीक्षा प्रश्‍न.. 237

(11.6) अभ्‍यास. 238

अध्याय 12 - प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल (भ्रष्‍ट को बदलने का अधिकार) समूह द्वारा प्रस्‍तावित महत्‍वपूर्ण प्रारूपों / क़ानून-ड्राफ्ट की सूची / लिस्ट.... 239

(12.1) पहली सरकारी अधिसूचना (भारतीय राजपत्र) 239

(12.2) अगली पांच महत्‍वपूर्ण सरकारी अधिसूचना (भारतीय राजपत्र) 239

(12.3) लोकतंत्र के प्रति सम्पूर्ण (ब्लैंकेट) प्रतिबद्धता.. 241

(12.4) कुछ छोटी मांगें. 241

(12.5) वे सरकारी अधिसूचनाएं जिनकी मांग हम गरीबी से होनेवाली मौतों को कम करने और बुजुर्ग / वृद्ध लोगों की सहायता के लिए करते हैं 242

(12.6) सेना में सुधार के लिए सरकारी अधिसूचनाएं और कदम जिनकी मांग हम आम नागरिक करते हैं 243

(12.7) पुलिस में सुधार के लिए सरकारी अधिसूचनाएं जिनकी मांग हम करते हैं 244

(12.8) सरकारी अधिसूचनाएं जिनकी मांग हम न्‍यायालयों / कोर्ट में सुधार लाने के लिए करते हैं 244

(12.9) सरकारी अधिसूचनाएं जिनकी मांग हम सामान्‍य प्रशासन में सुधार लाने के लिए करते हैं 246

(12.10) प्रजा अधीन राजा / राईट टू रिकॉल के क़ानून-ड्राफ्ट... 247

(12.11) वे सरकारी अधिसूचनाएं जिनकी मांग हम `कर` लगाने / टैक्सेशन के तरीके में सुधार लाने के लिए करते हैं 251

(12.12) वे सरकारी अधिसूचनाएं जिनकी मांग हम बांग्‍लादेशियों की घुसपैठ कम के लिए करते हैं 252

(12.13) वे सरकारी अधिसूचनाएं जिनकी मांग हम जम्‍मू-कश्‍मीर को बचाने के लिए करते हैं 252

(12.15) बहुराष्‍ट्रीय कम्‍पनियों के आगमन और भारत को फिर से गुलाम बनाने को कम करने के लिए सरकारी अधिसूचना (भारतीय राजपत्र) 253

(12.16) अन्‍य भौतिक मांगें. 254

(12.17) अन्‍य संकेतात्‍मक मांगें. 254

अध्याय 13 - हर हफते केवल दो-चार घंटे का समय देकर आप भारत में प्रजा अधीन राजा क़ानून-ड्राफ्ट को लाने में सहायता कर सकते हैं. 256

(13.1) क्‍या यह एक और मजाक है? 256

(13.2) पैसा, समाचारपत्र के विज्ञापनों के लिए छोड़कर लगाना बेकार है- मुझे केवल आपका समय और आपके समाचारपत्र विज्ञापन चाहिए 256

(13.3) प्रस्तावित काम करने का तरीका `प्रजा-अधीन राजा / राईट टू रिकाल` कार्यकर्ताओं के लिए : वायरस एक के दल में काम करता है 258

(13.4) `प्रजा अधीन-राजा` क़ानून-ड्राफ्ट के प्रचार के तरीकों के कोई अन्य सेट क्यों नहीं? 259

(13.5) कार्यकलाप की सूची, कारण, और वह समय जो इनमें लगेगा: सेट-1- मतदाताओं के लिए 260

(13.6) पोस्ट-कार्ड, इनलैंड ( अंतर्देशीय ) जैसी छोटी चीज भेजनी क्यों जरूरी है? 274

(13.7) ये कदम कैसे मदद करते हैं- इन्टरनेट के द्वारा प्रचार 276

(13.8) ये कदम कैसे मदद करते हैं- बिना इन्टरनेट के प्रचार 277

(13.9) दान और सदस्यता-शुल्क जमा करने के बिना प्रचार के खर्चे कैसे पूरे होंगे और बिना संगठन के ,प्रचार कैसे होगा.. 279

(13.10) कार्यकलापों की सूची/लिस्ट, कारण और वह समय जो इनमें लगेगा: सेट 2 (कार्यकर्ताओं के लिए ) 281

(13.11) सभी कार्यकर्ताओं के लिए योजना का सारंश (छोटे रूप में ) 285

(13.12) कार्यकलापों की सूची, कारण और वह समय जो इनमें लगेगा: सेट 3 (`प्रजा अधीन - राजा के मंच पर चुनाव लड़ने वालों के लिए ) 289

(13.13) प्रस्तावित चुनाव-प्रचार के तारीके. 293

(13.14) क्या कार्यकर्तओं को खुद पर्चे छापने / बांटने चाहिए या नेता को उसकी देख-रेख करनी चाहिए ? 296

(13.15) `प्रजा अधीन-राजा`/`राईट टू रिकाल`(भ्रष्ट को नागरिकों द्वारा बदलने का अधिकार) के विरोधी , नकली `प्रजा अधीन-राजा`-समर्थक के लक्षण / चिन्ह और चालें. 299

(13.16) सारांश (छोटे में बात) 307

अध्याय 14 - `जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली (सिस्टम)` आन्‍दोलन के जरिए लाना न कि चुनाव जीतकर. 308

(14.1) भारत में सतयुग लाने के लिए तीन कदमों का तरीका.. 308

(14.2) आन्‍दोलन (व्यापक आन्दोलन / जन आंदोलन) से मेरा क्‍या मतलब है? 308

(14.3) क्‍या नागरिकगण इतने शक्‍तिशाली हैं कि वे प्रधानमंत्री को बाध्‍य / मजबूर कर दें ? अथवा क्‍या आन्दोलन एक बेकार का विचार है | 310

(14.4) जयप्रकाश नारायण वर्ष 1977 से पहले इस कानून को लागू कराने में असफल रहे थे। जनता की आवाज (पारदर्शी शिकायत प्रणाली (सिस्टम)) के लिए आन्‍दोलन कैसे सफल होगा? 313

(14.5) एकमात्र कार्य संचार / संपर्क कार्य. 313

(14.6) अपनी बात का प्रचार-प्रसार कैसे किया जा सकता है? 314

अध्याय 15 - प्रिय कार्यकर्ता, क्‍या आपकी कार्रवाई पर्याप्‍त और क्‍लोन पॉजिटिव है?.. 317

(15.1) यह कैसा प्रश्‍न है ? और यह क्‍लोन पॉजीटिव होना क्‍या बला है? 317

(15.2) इस पाठ का उद्देश्‍य / प्रयोजन. 317

(15.3) सबसे महत्‍वपूर्ण खतरा जिसका सामना भारतीय कर रहे हैं - और अधिकांश सक्रियवादी नेता इसकी अनदेखी कर रहे हैं 318

(15.4) अच्छी राजनीती बनाम दुकानदारी राजनीति.. 319

(15.5) अच्छी राजनीति में सबसे महत्‍वपूर्ण मूलभूत / प्रमुख सीमा.. 320

(15.6) असली कार्यकर्ता नेता बनाम नकली कार्यकर्ता नेता.. 321

(15.7) अपर्याप्‍त कार्य क्‍या हैं और क्‍लोन निगेटिव कार्य क्‍या हैं ? 324

(15.8) दो प्रश्‍न जो छोटे / जूनियर कार्यकर्ता को अपने कार्यकर्ता नेता से अवश्‍य पूछना चाहिए 326

(15.9) भ्रष्‍टाचार कम करने की कोई जरूरत नहीं बनाम भ्रष्‍टाचार कम करना बहुत जरूरी है कार्य 328

(15.10) अनेक कार्यकर्ता नेता: कानूनों के ड्राफ्टों को बदलने में समय बरबाद न करें 329

(15.11) कार्यकर्ता नेता-` व्यवस्था परिवर्तन / सिस्टम को बदलेंगे` , लेकिन कानूनों के प्रारूप / क़ानून-ड्राफ्ट नहीं देते 330

(15.12) कार्यकर्ता नेता - आइए, कानूनों के ड्राफ्टों को ही बदल दें, लेकिन ड्राफ्टों को पढ़ने में समय बरबाद न करें। 331

(15.13) अब तक का सारांश (छोटे में बात) 332

(15.14) कानून के ड्राफ्टों के लिए सक्रियतावाद पर कुछ और बातें. 332

(15.15) कानूनों के प्रारूपों / क़ानून-ड्राफ्ट को बदलने के लिए चुनाव आधारित कार्रवाई का प्रस्‍ताव करने वाले नेता 334

(15.16) एक नेता के नेतृत्‍व / नीचे में एकता द्वारा क्‍लोन निगेटिव की स्‍थिति से उबरने का प्रयास बेकार / व्यर्थ है 337

(15.17) एक संगठन के नीचे एकता कायम करके क्‍लोन निगेटिव की स्‍थिति से उबरने का प्रयास भी बेकार / व्‍यर्थ है 339

(15.18) क्‍लोन-निगेटिव की स्‍थिति से उबरने के लिए समाचारपत्रमालिकों का सहयोग लेना कुछ कारगार , कुछ बेकार है 341

(15.19) तो क्‍या कोई पर्याप्‍त और क्‍लोन-पॉजिटिव तरीका है? 342

(15.20) क़ानून-ड्राफ्ट के लिए `नेता-रहित (व्‍यापक) जन-आन्‍दोलन` पर्याप्‍त और क्‍लोन पॉजिटिव है 343

(15.21) क़ानून-ड्राफ्ट के लिए नेता-रहित व्‍यापक (फैला हुआ) आन्दोलन में समय भी कम लगेगा 347

(15.22) क्‍या सततता / निरंतरता होना जरूरी है? 348

(15.23) सारांश ( छोटे में बात ) 349

(15.24) फिक्स-अनशन , सत्याग्रह और गांधीगिरी का सच. 349

(15.25) इस पाठ का उद्देश्‍य पुनरावलोकन (फिर से देखना) 349

अध्याय 16 - प्रिय कार्यकर्ता, क्‍या आपके नेता कानूनों के ड्राफ्ट देने / बताने से मना करते हैं ?.. 351

(16.1) इस पाठ का उद्देश्‍य.. 351

(16.2) कानून ड्राफ्टों के अभाव में सभी प्रयास व्‍यर्थ हो जाते हैं 353

(16.3) नागरिकों और सांसदों का कार्य. 356

(16.4) क़ानून-ड्राफ्ट रहित कार्यकर्ता : बिना डिजाइन का इंजिनियर 356

(16.5) कानून-ड्राफ्ट (प्रारूपों) का उपयोग करके आन्‍दोलन खड़ा करना नेताओं को आदर्श प्रतिनिधि / नुमाइंदा बनाकर पेश करने से कहीं ज्‍यादा आसान है 357

(16.6) ऊंचे/विशिष्ट लोग क़ानून-ड्राफ्ट से ज्‍यादा व्‍यक्‍ति को प्राथमिकता देते हैं ; कार्यकर्ताओं को इसके विपरित काम करना चाहिए 358

(16.7) आपका प्रस्‍ताव असंवैधानिक है के तर्क से निपटने के लिए क़ानून-ड्राफ्ट एकमात्र रास्‍ता है 359

(16.8) प्रारूप / क़ानून-ड्राफ्ट न देने के लिए गलत कारण / बहाने. 360

(16.9) तब क्‍या होगा जब आपका कार्यकर्ता-नेता क़ानून-ड्राफ्ट देने के लिए राजी हो जाता है? 362

(16.10) भारत में इतनी समस्याएं क्यों हैं? 363

(16.11) सारांश (छोटे में बात ) : 364

अध्याय 17 - प्रिय कार्यकर्ता, आन्‍दोलन में, चुनाव जीतने से कम समय लगेगा... 365

(17.1) इस पाठ का उद्देश्‍य.. 365

(17.2) केवल चुनाव के तरीके की जगह व्‍यापक जन-आन्दोलन के लाभ तथा इसकी विशेषताएं 366

(17.3) क्‍यों व्‍यापक (फैला हुआ) जन-आन्दोलन कार्यकर्ताओं के लिए चुनाव के तरीके की तुलना में कम समय लेने वाला होता है? 369

(17.4) 100 कानून ड्राफ्टों को पारित करने में जरूरी समय भी, एक चुनाव जीतने में लगने वाले समय से कम है 371

(17.5) तब क्‍यों नेता भी चुनाव तक रूकने पर जोर देते हैं? 372

(17.6) पिछले तीन पाठों का सारांश (छोटे में बात ) 373

अध्याय 18 - `जनता की आवाज` पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली (सिस्टम) पर प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री के हस्‍ताक्षर कर देने के बाद राइट टू रिकॉल ग्रुप / प्रजा अधीन राजा समूह की कार्य-नीति... 374

अध्याय 19 - अंतिम योजना : सभी दलों / पार्टियों के कार्यकर्ताओं को `जनता की आवाज` पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) , प्रजा अधीन राजा / राइट टू रिकॉल (भ्रष्‍ट को बदलने का अधिकार) के बारे में सूचित करना 376

(19.1) प्रजा अधीन राजा / राइट टू रिकॉल समूह का सारांश (छोटे में बात) 376

(19.2) राइट टू रिकॉल ग्रुप / प्रजा अधीन राजा समूह का सबसे महत्‍वपूर्ण कदम. 376

(19.3) क्‍यों राजनीतिक दलों के सदस्‍यों से सम्‍पर्क करें? 376

(19.4) कृपया कभी भी किसी पार्टी के सदस्‍य से उनकी पार्टियां छोड़ने को नहीं कहें ; केवल उनसे `जनता की आवाज` पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम), प्रजा अधीन राजा / राइट टू रिकॉल (भ्रष्‍ट को बदलने का अधिकार) कानून-प्रारूपों / क़ानून-ड्राफ्ट को उनके अपने पार्टी के चुनावी घोषण पत्र में शामिल कर लेने के लिए कहें 377

(19.5) किसी दल के सदस्‍यों से मिलने पर बातचीत / चर्चा के लिए सुझाए गए बिन्‍दु.. 379

(19.6) रिश्वत लेने के लिए हजार अप्रत्यक्ष तरीके जिसमें भ्रष्ट सरकारी अधिकारी पैसे को छूता भी नहीं है और रिश्वत वाइट(कानूनी तरीके से) में लेता है | 380

(19.7) नयी प्रवृत्ति / झुकाव मंत्रियों से अधिकार छीनने का और नियामक जैसे जनलोकपाल आदि को देने का 384

(19.8) अनैच्छिक / बिना इच्छा के , अनदेखे , अज्ञात / अनजाना परिणाम के तर्क. 386

(19.9) कैसे केवल 2 लाख कार्यकर्ता महीने के कम से कम 10 घंटे और 500 रुपये खर्च करके भ्रष्टाचार , गरीबी को एक साल में कम कर सकते हैं 387

अध्याय 20 दान / चन्‍दा के खिलाफ क्‍यों?.. 390

(20.1) समाचारपत्रों के विज्ञापनों के लिए योगदान / अंशदान, लेकिन सीधे नकद दान / चन्‍दा नहीं 390

(20.2) समाचारपत्रों के विज्ञापनों के लिए योगदान / अंशदान, लेकिन सीधे नकद दान / चन्‍दा नहीं 390

(20.3) सीधे दान लेने और अप्रत्‍यक्ष रूप से योगदान / अंशदान करने के बीच तुलना.. 391

(20.4) 80 जी का विरोध. 392

अध्याय 21 - न्‍यायालयों / कोर्ट में भ्रष्‍टाचार और भाई-भतीजावाद कम करने के लिए राइट टू रिकॉल ग्रुप / प्रजा अधीन राजा समूह के प्रस्‍ताव.. 393

(21.1) हमें न्‍यायालयों / कोर्ट में सुधार की जरूरत क्‍यों है? 393

(21.2) ऐसे अन्‍यायपूर्ण फैसलों का समाज पर प्रभाव 397

(21.3) न्‍यायालय / कोर्ट में और सुधार की राइट टू रिकॉल ग्रुप / प्रजा अधीन राजा समूह की मांग और वायदे 397

(21.4) सुप्रीम कोर्ट के प्रधान जज को बदलने का अधिकार नागरिकों को देना.. 399

(21.5) 1,00,000 (एक लाख) और न्‍यायालयों / कोर्ट की स्‍थापना करना.. 399

(21.6) निचली अदालतों , हाई-कोर्ट और सुप्रीम-कोर्ट में निष्‍ठा / ईमानदारी की कमी की समस्‍या.... 400

(21.7) जूरी प्रणाली (सिस्टम) के बारे में. 401

(21.8) जूरी प्रणाली (सिस्टम) और सूचना-संबंधी कारक. 413

(21.9) सभी राजनैतिक दलों, बुद्धिजीवियों की जूरी प्रणाली (सिस्टम) पर (राय / विचार) 414

(21.10) नानावटी मामला.. 414

(21.11) भारत की निचली अदालतों में जूरी प्रणाली(सिस्टम) लाने के लिए सरकारी अधिसूचना का प्रारूप / क़ानून-ड्राफ्ट... 416

(21.12) नागरिकगण भारत में जूरी प्रणाली (सिस्टम) कैसे ला सकते हैं? 425

(21.13) जजों की नियुक्‍ति / भर्ती में भाई-भतीजावाद कम करना.. 425

(21.14) सारी जनता को कानून की पढ़ाई पढ़ाना और अन्‍य परिवर्तनों के बारे में बताना.. 426

(21.15) कु-बुद्धिजीवी लोग जजों में भ्रष्‍टाचार को समर्थन देंगे. 426

(21.16) न्‍यायालयों / कोर्ट में सुधार करने पर सभी दलों और बुद्धिजीवियों का रूख. 428

(21.17) कुछ प्रश्‍न.. 430

अध्याय 22 - पुलिस में सुधार लाने के लिए राइट टू रिकॉल ग्रुप / प्रजा अधीन राजा समूह का प्रस्ताव 433

(22.1) पुलिस में सुधार के लिए प्रस्‍तावित परिवर्तन / बदलाव 433

(22.2) प्रस्तावित प्रजा अधीन जिला पुलिस कमिश्नर 433

(22.3) कोरोनर्स जांच / इनक्‍वेस्‍ट (अर्थात कोरोनर की अदालत अथवा कोरोनर की जूरी) (कोरोनर= अपमृत्यु का कारण ज्ञात करनेवाला अफसर = मृत्यु समीक्षक ) 437

(22.4) पुलिसवालों पर प्रस्‍तावित जूरी प्रणाली (सिस्टम) का विवरण. 439

(22.5) पुलिस विभाग में सुधार करने के लिए माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय / सुप्रीम-कोर्ट के हाल के आदेशों पर (राय) 440

(22.6) सभी दलों और प्रमुख बुद्धिजीवियों की पुलिस में सुधार करने पर (राय) 440

अध्याय 23 - भारतीय रिजर्व बैंक में सुधार करने और महंगाई / मुद्रास्‍फीति कम करने के लिए राइट टू रिकॉल ग्रुप / प्रजा अधीन राजा समूह के प्रस्‍ताव.. 442

(23.1) महंगाई का असली कारण क्या है ? 442