प्रजा
अधीन
राजा/राईट टू
रिकाल समूह
(अपंजीकृत) के
प्रस्ताव,श्री राजीव दीक्षित
जी द्वारा
समर्थित
तीन
लाइन का क़ानून
गरीबी और
भ्रष्टाचार
कम कर सकता है
कुछ ही महीनों
में
– पारदर्शी
शिकायत / प्रस्ताव
प्रणाली!!
जब
सत्ता कुछ ही
लोगों के पास
होती है तो
समाज में
भ्रष्टाचार होता है.
इसीलिए सत्ता
हर एक जन के
पास होनी
चाहिए.सत्ता
जानने की, सत्ता
बताने की और
सत्ता निर्णय
लेने की.
एक तीन
लाइन के क़ानून
पारित होने से
ये संभव है
कुछ ही महीनों
में.
कृपया
इस जनता की
आवाज़
पारदर्शी
शिकायत / प्रस्ताव
प्रणाली को
समर्थन करें
और मांग करें |
ये क़ानून-ड्राफ्ट
किसने लिखे ?
सभी बंधू
जन,
यदि कोई
आप से प्रश्न
पूछे ----“ किसने
प्रस्तावित
सरकारी
राजपत्र
अधिसूचना क़ानून-ड्राफ्ट
लिखा है जैसे `जनता
की आवाज़ पारदर्शी
शिकायत/प्रस्ताव
प्रणाली`, प्रजा
अधीन
राजा/राईट टू
रिकाल(भ्रष्ट
को बदलने का
अधिकार)
प्रधान
मंत्री , प्रजा
अधीन लोकपाल, प्रजा
अधीन सुप्रीम
कोर्ट-मुख्य
जज ,प्रजा
अधीन रिसर्व
बैंक गवर्नर , नागरिकों
और सेना के
लिए खनिज रोयल्टी
(आमदनी)(एम.आर.सी.एम),प्रजा
अधीन
न्यायतंत्र
(जूरी सिस्टम)
आदि, कृपया जोर
से बोलें कि
आप ने स्वयं
लिखा है|
उदहारण के
लिए,एक कलम और
कागज़ लें और
उसपर `जनता की
आवाज़
पारदर्शी
शिकायत/प्रस्ताव
प्रणाली` का तीन
लाइन का क़ानून-ड्राफ्ट
लिखें एक
पन्ने पर और
फिर यदि आप
कहते हैं कि आपने
स्वयं `जनता की
आवाज़
पारदर्शी
शिकायत/प्रस्ताव
प्रणाली` लिखा है , तो ये
तथ्य और
कानूनी रूप से
सही है
क्योंकि `जनता
की आवाज़
पारदर्शी
शिकायत/प्रस्ताव
प्रणाली ` क़ानून-ड्राफ्ट
में केवल कॉपी-लेफ्ट
है कॉपी-राईट
नहीं |
और ये
नैतिक रूप से
भी सही है, क्योंकि
सभी मालिक हैं
गैर-कॉपी-राईट
सामग्री का, जब
तक वे चाहें
मालिक होना | और
यदि ओई पूछता
है “ किसने ये क़ानून-ड्राफ्ट
पहले लिखे हैं”, तो
बताएं कि
प्रजा अधीन
राजा
अथर्ववेद में
दिया है, और
इसीलिए श्री
सूर्य ने पहली
बार लिखा था
कोई ८० लाख
वर्ष पूर्व | और
श्री सूर्य को
भी कोई कॉपी-राईट
नहीं चाहिए |
-------------------------------------------------------------------------------------
अनुवादक-
श्री नीरज
श्रीवास्तव
प्रूफ-संशोधन
– अनिल, हर्षित,
अनुभव, मंज़ूर
भाई, महेश
कुमार ,सुमित
वर्मा, अलोक
वर्मा, महेंदर सिंह, सुरेंदर
और अन्य |
हम कोई
राजनैतिक
पार्टी नहीं
हैं `पार्टी` शब्द
समूह के अर्थ
में भी प्रयोग
हो सकता है कुछ
सन्दर्भ में | हम
अपंजीकृत
समूह हैं ,ये
सरकारी
अधिसूचना को
पारित करने की
मांग कर रहे
हैं –
(1)`जनता
की आवाज़
पारदर्शी
शिकयात/प्रस्ताव
प्रणाली`
(2)`नागरिक
और सेना के
लिए खनिक रोयल्टी
(आमदनी)` (एम.आर.सी.एम)
(3) प्रजा
अधीन राजा
(भ्रष्ट को
बदलने का नागरिकों
का अधिकार) सभी
मुख्य पदों पर
(4) प्रजा
अधीन
न्यायतंत्र (जूरी
सिस्टम)
न्यायालय/कोर्ट
में
वेबसाइट- www.righttorecall.info /
http://www.righttorecall.com
http://www.righttorecallindia.com
ब्लॉग : http://blog.righttorecall.info
फोरम : http://forum.righttorecall.info
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हमारा
मुख्य
प्रस्ताव `जनता की
आवाज़`
पारदर्शी
शिकायत/प्रस्ताव
प्रणाली है |(पहला
अध्याय देखें)
इसी के द्वारा
अन्य प्रस्ताव
आयेंगे कुछ ही
महीनों में |अन्य
प्रस्ताव की
बाराकियों या
पुरे प्रस्ताव
से पाठक असहमत
भी हो सकते
हैं| क्योंकि
एक बार `जनता
की आवाज़
पारदर्शी
शिकायत/प्रस्ताव
प्रणाली`सरकारी
अधिसूचना
पारित होने पर
जनता निर्णय करेगी
कि इस पुस्तक
में अन्य
प्रस्ताव
पारित होने चाहिए
के नहीं या
कोई इनसे भी
अच्छे प्रस्ताव
जनता द्वारा
पारित किये
जाएँ |हम
ये जनहित के
क़ानून करोड़ों
आम-नागरिकों
के समर्थन
द्वारा लाना
चाहते हैं |
कॉपी-लेफ्ट
मैं इस
पुस्तक कि कॉपी-राईट(copyright) केवल
इतना सुनिश्चित
करने के लिए
कर रहा हूँ कि
कोई भी अन्य
व्यक्ति इसकी
सामग्री की कॉपी-राईट
ना कर सके और
इसके वितरण पर
नियंत्रण न कर
सके| ये कॉपी-राईट
किसी को पर्चे,आदि
कॉपी बनाने और
वितरण करने
में बाध्य
नहीं है| कोई भी
भी इस पुस्तक
या इसके अंश
की प्रतियां/कापियां
बनाने के लिए
स्वतंत्र है, और
वितरण करने
मुक्तरूप से
प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक
या किसी भी
रूप में बिना
हमारे नाम दिए| कोई
भी इस पुस्तक
या अंश को अनुवाद
करने के लिए
स्वतंत्र है
किसी भी भाषा में
| कोई अनुमति
या भुगतान की
आवश्यकता
नहीं है या अपेक्षा
भी है|
------ प्रजा अधीन
राजा समूह
(राईट टू
रिकाल ग्रुप), लेखक
राजीव दीक्षित
जी ने राईट टू
रिकाल (भ्रष्ट
को बदलने की
प्रणाली) का
समर्थन किया
है (समर्थित
यू-ट्यूब विडियो)
-
http://www.youtube.com/watch?v=pL-DoRQmcl0
http://www.youtube.com/watch?v=EywTrIr3-M
प्रिय
पाठकगण,
मैंने इस
पुस्तक को
पंक्तिरूप (linear fashion) में
लिखने का
प्रयास किया
है | यदि
पाठक ये चाहता
है कि वो केवल `क` पन्ने
पढे, तो
वो केवल पहले `क` पन्ने
पढना
पर्याप्त
होगा | सामान्य
रूप से , अधिकतर
महतवपूर्ण
विषय पहले रखे
गए हैं और पहले
कुछ पन्नों को
समझने के लिए
बाद के पन्नों
में क्या लिखा
है , ये
जानना आवश्यक
नहीं है | यदि आप
(पाठक) का कोई
प्रश्न है
किसी भी लाइन
पर इस पुस्तक
में, तो
कृपया बिना
संकोच के , जरुर
www.forum.righttorecall.info पर अपना
प्रश्न डालें |
ये
पुस्तक इतनी
बड़ी क्यों है ?
दखिए , हमें
कार्यकर्ताओं
की जरूरत है,
जो की इन जन-हित
के क़ानून-ड्राफ्ट
को जन-जन तक
पहुंचा सकें,
ताकि जन-जन
इसकी मांग करे
और ये क़ानून
हमारे देश में
लागू हो सकें |
और ज्यादातर
कार्यकर्ताओं
के
पसंदीदा/पसंद
के
मुद्दे/विषय
होते हैं |
उदाहरण, कुछ
कार्यकर्त्ता
, शिक्षा को
जरुरी मुद्दा
समझते हैं ,
कुछ
भ्रष्टाचार को
सबसे जरूरी
मुद्दा समझते
हैं, कुछ
गो-हत्या, आदि|
यदि उनका पसंद
का मुद्दा
गायब हो, तो ये
पुस्तक उनके
लिए बेकार
होगी |
अब मैं सबसे
अधिक
कार्यकर्ताओं
को ये दिखाना चाहता
हूँ कि उनका
उनका पसंद का
मुद्दा/विषय को
प्रस्तावित
`प्रजा
अधीन-राजा`,
`पारदर्शी
शिकायत
प्रणाली(सिस्टम),
आदि क़ानून-ड्राफ्ट
से फायदा होगा
और इनके
द्वारा आसानी
से लागू किये
जा सकते हैं |
और इसके लिए
मुझे सभी
पसंदीदा
मुद्दे की बात
करनी पड़ी |
इसीलिए मैंने क़ानून-ड्राफ्ट
या कानूनों का
सारांश (छोटे
में) लिखा
भारत की 80 के
करीब बड़ी
समस्याएं को
हल करने के
लिए , कार्यकर्ताओं
की आशाओं को
पूरा करने के
लिए |
इसीलिए
ये पुस्तक
इतनी लंबी हो
गयी है |
और
मैंने बड़े
अक्षर
इस्तेमाल
किये हैं और
अधिक अंतर रखा
है वाक्यों के
बीच , ताकि
बुजर्ग लोग भी
आसानी से ये
पढ़ सकें |
लेकिन
आपको सारे
पन्ने पढ़ने की
जरूरत नहीं
है| केवल पहला
अध्याय पढ़ें
और फिर अपने
पसंद के
विषय/मुद्दा
जैसा सेना और
देश की
सुरक्षा ,
शिक्षा,
स्वदेशी, कोर्ट
, पोलिस आदि
में
भ्रष्टाचार
कैसे कम करना,
या गौ-रक्षा
आदि, पर जा सकते
हैं , विषय
सूची पर एक
नजर देखकर |
इस
किताब/पुस्तक
के लगबग प्रत्येक
पाठ में यह
बताने के लिए
समीक्षा
प्रश्न हैं
कि उनका उत्तर
देकर पाठक
अपने आप को
संतुष्ट कर
सकता है कि
उसने इस पाठ
को पढ़ लिया
है और प्रत्येक
पाठ में पाठक
के लिए कुछ
अभ्यास-प्रश्न
हैं ताकि वह
भारतीय
प्रशासन से परिचित
हो सके।
भारत में , हमें
आदत है अच्छे
लोगों का
इंतज़ार करने
की ,कि
वे सत्ता में
आयें और भारत
को सुधारने और
गरीबी और
भ्रष्टाचार
को समाप्त
करेंगे | इस
के बदले हम
नागरिकों को
सत्ता अपने
हाथ में लेने
चाहिए
मंत्रियों और
न्यायाधीशों/जजों
से|हम
प्रजा अधीन
राजा(भ्रष्ट
को बदलने का नागरिकों
का अधिकार) और
जूरी सिस्टम
(भ्रष्ट को
सज़ा देने का नागरिकों
का अधिकार) की
मांग कर सकते
हैं और सत्ता
अपने हाथों
में ले सकते
हैं |ये
केवल मूर्खता
है अच्छे नेता
और न्यायाधीस/जज
के लिए सत्ता
में आने का
इन्तेज़ार
करना | कहानी की
सीख ये है की
भारतीय
नागरिक इतने
सौभाग्यशाली
नहीं हैं कि
उन्हें पिछले
65 वर्षों में
कोई अच्छा
नेता मिला हो |
यह किताब
हर ३-४ महीनो
में अपडेट
होती रहती है
और इसकी कॉपी
इन्टरनेट
पर
मुफ्त है आप
इसको नीचे दी
गई लिंक पर
जाकर डाउनलोड
कर सकते हैं |
तो कृपया आपसे
विनती है कि
इसे हर ३-४
महीने के बाद
अपडेट करते
रहें-
http://righttorecall.info/301.h.pdf & http://righttorecall.info/301.h.doc
(1.3) क्या
भारत में सभी
नागरिकों के
पास इस कानून का
उपयोग करने
के लिए
इन्टरनेट है? और
अन्य प्रश्न
(1.4) ‘जनता
की आवाज
(सूचना का
अधिकार-2)`
का एक लाइन
में सार
(1.5) ‘जनता
की आवाज-पारदर्शी
शिकायत/प्रस्ताव
प्रणाली(सिस्टम)` के खण्ड 1 के
बारे में कुछ
और बातें
(1.6) ये तीन
लाइन का
सरकारी आदेश
आम जनता को
पारदर्शी
शिकायत/प्रस्ताव/सुझाव
डालने का
अधिकार देगा
(1.9) जनता
की आवाज
(सूचना का
अधिकार-2)
कानून
पुलिस में
भ्रष्टाचार
को कम
कैसे करेगा?
(1.14) उन
नेताओं, बुद्धिजीवियों
की निंदा
कैसे करें जो
जनता की आवाज
का विरोध
करते हैं
(1.15) ‘जनता
की आवाज
(सूचना का
अधिकार 2)’ को
लाने में आप
कैसे मदद कर
सकते हैं
(1.16) किसी
ने इस बारे
में पहले क्यों
नहीं सोचा ?
(1.17) कैसे ‘जनता की
आवाज (सूचना
का अधिकार 2)’ राजनैतिक
अंकगणित का
शून्य है ?
अध्याय
2 -
अमेरिकी
पुलिस में
भारतीय पोलिस
से भ्रष्टाचार
कम क्यों है?
(2.1) यह
बहुत ही
रहस्य भरा
प्रश्न है पर
इसका उत्तर
बहुत ही आसान
है!!
(2.2) राइट
टू रिकॉल (
भ्रष्ट को
नागरिकों
द्वारा निकालने/बदलने
का अधिकार) और
प्रजा अधीन
राजा
(2.3) प्रजा
अधीन
राजा/राइट टू
रिकॉल आधुनिक
अमेरिका में
(2.4) भारत
में प्रजा
अधीन
राजा/राइट टू
रिकॉल का संक्षिप्त
इतिहास
(2.5) पूरे
विश्व में प्रजा
अधीन
राजा/राइट टू
रिकॉल का
संक्षिप्त
इतिहास
(2.6)
आधुनिक भारत
में राइट टू
रिकॉल
(2.7) भारत
में राइट टू
रिकॉल/प्रजा
अधीन-राजा
प्रणाली(सिस्टम)
की संवैधानिक
वैधता
(2.9) राइट
टू रिकॉल की
मेरी खोज और
अथर्ववेद
(सत्यार्थ
प्रकाश)
अध्याय
3 -
`जनता
की
आवाज-पारदर्शी
शिकायत
प्रणाली(सिस्टम)`
पर
कुछ और बातें
(3.2) क्या
नागरिक
हजारों बार
केवल
हां-नहीं ही
दर्ज करवाते
रहेंगे?
(3.4)
नागरिकों से
हमारा अनुरोध
(3.5) `जनता
की
आवाज-पारदर्शी
शिकायत/प्रस्ताव
प्रणाली(सिस्टम)` और
नौकरियों में
आरक्षण
(3.7) क्या
अमीर लोग
हमारे
नागरिकों को
खरीदने में
सफल नहीं हो
जाएंगे?
(3.8) भारत
के अमीर वर्ग
की गलतफहमी
से उनके
जनसाधारण-समर्थक
कानूनों का
विरोध
अध्याय
4 -
प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री,महापौर/मेयर,सरपंच, हाई
कोर्ट के जज
को पत्र
(4.4) जिला
पंचायत अध्यक्ष
को पत्र
(4.5) हाई
कोर्ट के
जजों को पत्र
(4.7)
बुद्धिजीवियों
से इन पत्रों
पर हस्ताक्षर
करने के लिए
कहना
अध्याय
5 - प्रजा
अधीन राजा
समूह का
दूसरा प्रस्ताव
– नागरिकों और सेना
के लिए खनिज
रॉयल्टी
(5.2)
नागरिकों और
सेना के लिए
खनिज रॉयल्टी
(एम आर सी एम)
प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट
- संक्षेप में
(5.3)
नागरिकों और
सेना के लिए
खनिज रॉयल्टी
(एम आर सी एम) का
विस्तृत
क़ानून-ड्राफ्ट
/ प्रारूप
(5.5) राज्य
स्तर पर
नागरिकों और
सेना के लिए
खनिज रॉयल्टी
(एम आर सी एम)
क़ानून-ड्राफ्ट
/ प्रारूप
(5.6)
सार्वजनिक
भूमि का
किराया कितना
है ?
(5.7) खनिज
रॉयल्टी
कितनी है ?
(5.8) जमीन
का किराया
वसूलने / जमा
करने के
प्रभाव
(5.9) जमीन
का किराया
जमा ना करने/ न
वसूलने का
(कु)प्रभाव -
(5.10) राष्ट्रीय
भूमि किराया
अधिकारी (एम एल आर
ओ) को हटाने /
वापस बुलाने
का तरीका –
(5.13) 110 करोड़
नागरिकों को
भुगतान भेजने
में आनेवाली
लागत
(5.14) क्या
इससे सरकारी
आय कम नहीं
होगी ? नहीं।
(5.15) पश्चिम
में कोई ऐसा
कानून नहीं
है तो हमें
इसकी जरूरत
क्यों है?
(5.16) `नागरिक
और सेना के
लिए रोयल्टी
(आमदनी)`(एम.आर.सी.एम)
क़ानून-ड्राफ्ट
और
मानवाधिकार
(6.2)
प्रधानमंत्री
को हटाने /
बदलने के
क़ानून-ड्राफ्ट
का विवरण
(6.3)
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों
को बदलने के
लिए प्रस्तावित
प्रक्रिया/तरीका
का उदाहरण
(6.4) मुख्यमंत्री
को
हटाने/बदलने
के
क़ानून-ड्राफ्ट
का विवरण
(6.5) क्या
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री
हर सप्ताह
बदले जाएंगे? नहीं।
(6.6)
प्रधानमंत्री
को बदलने/
राइट टू
रिकॉल
प्रधानमंत्री
का प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट
(6.7) क्या
होगा यदि
प्रधानमंत्री
और सांसद
जनता का कहा
नहीं मानें?
(6.9) राइट
टू
रिकॉल/प्रजा
अधीन-मुख्यमंत्री
का
क़ानून-ड्रॉफ्ट
(6.10) तब क्या
होगा जब मुख्यमंत्री, विधायक
नागरिकों की
बात न मानें?
(6.11) राइट
टू रिकॉल /
प्रजा अधीन
नगर महापौर
का क़ानून-ड्रॉफ्ट/प्रारूप
(6.12) प्रजा अधीन-सांसद
क़ानून-ड्राफ्ट
( भ्रष्ट
सांसद को
नागरिकों
द्वारा बदलने
का अधिकार )
(6.17) प्रजा
अधीन
राजा/राइट टू
रिकॉल
(भ्रष्ट को
बदलने का
अधिकार)
प्रारूप/क़ानून-ड्राफ्ट का
प्रभाव
(6.18) बदलने /
हटाने की ये
प्रक्रियाएं
/ तरीके भ्रष्टाचार
को कैसे कम
करती हैं ?
(6.19) प्रजा
अधीन
राजा/राइट टू
रिकॉल तथा व्यावहारिक
ज्ञान / कॉमन
सेन्स
(6.20) प्रजा
अधीन
राजा/राइट टू
रिकॉल और
अथर्ववेद , सत्यार्थ
प्रकाश
(6.22) प्रजा
अधीन राजा /
राइट टू
रिकॉल के
विरूद्ध दिए
जाने वाले
तर्कों का
जवाब
(6.25) प्रजा
अधीन राजा
(राईट टू
रिकाल)/भ्रष्ट
को बदलने की
प्रक्रिया
अगले जन्म
में !
(7.4)
पश्चिमी
देशों में
ऐसा कोई
कानून नहीं
है, तो
हमें इसकी
जरूरत क्यों
है ?
(7.5)
राष्ट्रीय
न्यायिक आयोग
(एन.जे.सी.)-एक
बेकार / अनुपयोगी
विचार है
(8.1)
अनुसूचित
जाति, अनुसूचित
जनजाति और
अन्य पिछड़े
वर्ग के गरीब
लोगों के
समर्थन से
आरक्षण कम
करना
(8.2) प्रस्तावित
आर्थिक-विकल्प
प्रणाली(सिस्टम)
का विस्तृत
ब्यौरा
(9.1)
भारतीय
रिजर्व बैंक
(आर बी आई) के
गवर्नर की भूमिका
(9.2) प्रजा
अधीन - भारतीय
रिजर्व बैंक
(आर बी आई) के गवर्नर
(10.2) आर आर
जी (राईट टू
रिकाल/प्रजा
अधीन राजा)
समूह का
सारांश और
योजना
(10.3) आर आर
जी / प्रजा
अधीन राजा
समूह और अन्य
पार्टियों/
दलों के बीच
मुख्य अंतर
(10.4) हिंसा, क्रान्ति
आदि पर विश्व
के विचार
(10.5)
लोकतंत्र का
धर्म और
संविधान
(10.6) आर आर
जी समूह की
अन्य पुस्तकें
/ लेख
(10.7)
संपर्क /
इंटरनेट
समुदाय आदि
महत्वपूर्ण
यू.आर.एल इस
प्रकार हैं
(11.1) हम
अधिकांश दलों
और अधिकांश
बुद्धिजीवियों
से पूरी तरह
अलग हैं ।
मुख्य अंतर
इस प्रकार है
(11.2)
प्रचार के
तरीकों में
सबसे महत्वपूर्ण
अंतर
(11.3) प्रस्तावित
कानूनों के
प्रारूपों /
क़ानून-ड्राफ्टों
का महत्व
(11.4) भारत
के अधिकतर
बुद्धिजीवी -
विशिष्ट/उच्च
वर्ग के
एजेंट हैं
(12.1) पहली
सरकारी
अधिसूचना
(भारतीय
राजपत्र)
(12.2) अगली
पांच महत्वपूर्ण
सरकारी
अधिसूचना
(भारतीय
राजपत्र)
(12.3) लोकतंत्र
के प्रति
सम्पूर्ण
(ब्लैंकेट)
प्रतिबद्धता
(12.6) सेना
में सुधार के
लिए सरकारी
अधिसूचनाएं
और कदम जिनकी
मांग हम आम
नागरिक करते
हैं
(12.7) पुलिस
में सुधार के
लिए सरकारी
अधिसूचनाएं जिनकी
मांग हम करते
हैं
(12.8)
सरकारी
अधिसूचनाएं
जिनकी मांग
हम न्यायालयों
/ कोर्ट में
सुधार लाने
के लिए करते हैं
(12.9)
सरकारी
अधिसूचनाएं
जिनकी मांग
हम सामान्य
प्रशासन में
सुधार लाने
के लिए करते
हैं
(12.10) प्रजा
अधीन राजा /
राईट टू
रिकॉल के
क़ानून-ड्राफ्ट
(12.12) वे
सरकारी
अधिसूचनाएं
जिनकी मांग
हम बांग्लादेशियों
की घुसपैठ कम
के लिए करते
हैं
(12.13) वे
सरकारी
अधिसूचनाएं
जिनकी मांग
हम जम्मू-कश्मीर
को बचाने के
लिए करते हैं
(12.17) अन्य
संकेतात्मक
मांगें
(13.1) क्या
यह एक और मजाक
है?
(13.4) `प्रजा
अधीन-राजा` क़ानून-ड्राफ्ट
के प्रचार के
तरीकों के
कोई अन्य सेट
क्यों नहीं?
(13.5)
कार्यकलाप की
सूची, कारण,
और वह समय
जो इनमें
लगेगा: सेट-1- मतदाताओं
के लिए
(13.6) पोस्ट-कार्ड, इनलैंड
( अंतर्देशीय
) जैसी छोटी
चीज भेजनी
क्यों जरूरी
है?
(13.7) ये कदम कैसे
मदद करते हैं-
इन्टरनेट के
द्वारा
प्रचार
(13.8) ये कदम
कैसे मदद
करते हैं-
बिना
इन्टरनेट के
प्रचार
(13.10) कार्यकलापों
की
सूची/लिस्ट, कारण
और वह समय जो
इनमें लगेगा:
सेट – 2
(कार्यकर्ताओं
के लिए )
(13.11) सभी
कार्यकर्ताओं
के लिए योजना
का सारंश (छोटे
रूप में )
(13.13) प्रस्तावित
चुनाव-प्रचार
के तारीके
(13.14) क्या
कार्यकर्तओं
को खुद पर्चे
छापने / बांटने
चाहिए या
नेता को उसकी
देख-रेख करनी
चाहिए ?
(14.1) भारत
में सतयुग
लाने के लिए
तीन कदमों का
तरीका
(14.2) आन्दोलन
(व्यापक
आन्दोलन / जन
आंदोलन) से
मेरा क्या
मतलब है?
(14.5)
एकमात्र
कार्य – संचार /
संपर्क कार्य
(14.6) अपनी
बात का
प्रचार-प्रसार
कैसे किया जा
सकता है?
अध्याय
15 - प्रिय
कार्यकर्ता, क्या
आपकी
कार्रवाई
पर्याप्त और
क्लोन
पॉजिटिव है?
(15.1) यह
कैसा प्रश्न
है ?
और
यह क्लोन
पॉजीटिव होना
क्या बला है?
(15.2) इस
पाठ का
उद्देश्य /
प्रयोजन
(15.4) अच्छी
राजनीती बनाम
दुकानदारी
राजनीति
(15.5) “अच्छी
राजनीति” में
सबसे महत्वपूर्ण
मूलभूत /
प्रमुख सीमा
(15.6) असली
कार्यकर्ता
नेता बनाम
नकली कार्यकर्ता
नेता
(15.7)
अपर्याप्त
कार्य क्या
हैं और क्लोन
निगेटिव
कार्य क्या
हैं ?
(15.8)
दो प्रश्न
जो छोटे /
जूनियर
कार्यकर्ता
को अपने
कार्यकर्ता
नेता से अवश्य
पूछना चाहिए
(15.9) “भ्रष्टाचार
कम करने की
कोई जरूरत
नहीं” बनाम “भ्रष्टाचार
कम करना बहुत
जरूरी है” कार्य
(15.10) अनेक
कार्यकर्ता
नेता:
कानूनों के
ड्राफ्टों को
बदलने में
समय बरबाद न
करें
(15.13) अब तक का
सारांश (छोटे
में बात)
(15.14) “कानून
के ड्राफ्टों
के लिए
सक्रियतावाद”
पर कुछ और
बातें
(15.19) तो क्या
कोई पर्याप्त
और क्लोन-पॉजिटिव
तरीका है?
(15.20) क़ानून-ड्राफ्ट
के लिए `नेता-रहित
(व्यापक)
जन-आन्दोलन`
पर्याप्त
और क्लोन
पॉजिटिव है
(15.21) क़ानून-ड्राफ्ट
के लिए
नेता-रहित व्यापक
(फैला हुआ)
आन्दोलन में
समय भी कम
लगेगा
(15.22) क्या
सततता /
निरंतरता
होना जरूरी
है?
(15.23) सारांश (
छोटे में बात )
(15.24)
फिक्स-अनशन ,
सत्याग्रह और
गांधीगिरी का
सच
(15.25)
इस पाठ का
उद्देश्य – पुनरावलोकन
(फिर से देखना)
अध्याय
16 - प्रिय
कार्यकर्ता,
क्या आपके
नेता कानूनों
के ड्राफ्ट
देने / बताने
से मना करते
हैं ?
(16.2) कानून – ड्राफ्टों
के अभाव में
सभी प्रयास
व्यर्थ हो
जाते हैं
(16.3)
नागरिकों और
सांसदों का
कार्य
(16.4)
क़ानून-ड्राफ्ट
– रहित
कार्यकर्ता :
बिना डिजाइन
का इंजिनियर
(16.7) “आपका
प्रस्ताव
असंवैधानिक
है” के
तर्क से
निपटने के
लिए
क़ानून-ड्राफ्ट
एकमात्र रास्ता
है
(16.8)
प्रारूप /
क़ानून-ड्राफ्ट
न देने के लिए
गलत कारण /
बहाने
(16.9) तब क्या
होगा जब आपका
कार्यकर्ता-नेता
क़ानून-ड्राफ्ट
देने के लिए
राजी हो जाता
है?
(16.10) भारत में
इतनी
समस्याएं
क्यों हैं?
(16.11) सारांश
(छोटे में बात ) :
अध्याय
17 - प्रिय
कार्यकर्ता,
आन्दोलन
में, चुनाव
जीतने से कम
समय लगेगा
(17.2) केवल
चुनाव के
तरीके की जगह
व्यापक
जन-आन्दोलन
के लाभ तथा
इसकी
विशेषताएं
(17.5) तब क्यों
नेता भी “
चुनाव तक
रूकने ” पर
जोर देते हैं”?
(17.6) पिछले
तीन पाठों का
सारांश (छोटे
में बात )
(19.1) “प्रजा
अधीन राजा /
राइट टू
रिकॉल समूह” का सारांश
(छोटे में बात)
(19.2) राइट
टू रिकॉल
ग्रुप / प्रजा
अधीन राजा
समूह का सबसे
महत्वपूर्ण
कदम
(19.3) क्यों
राजनीतिक
दलों के सदस्यों
से सम्पर्क
करें?
(19.5) किसी
दल के सदस्यों
से मिलने पर
बातचीत /
चर्चा के लिए
सुझाए गए
बिन्दु
(19.7) नयी
प्रवृत्ति /
झुकाव
मंत्रियों से
अधिकार छीनने
का और “नियामक” जैसे
जनलोकपाल आदि
को देने का
(19.8) “अनैच्छिक
/ बिना इच्छा
के ” , “अनदेखे” , “अज्ञात
/ अनजाना” परिणाम
के तर्क
अध्याय
20 – दान /
चन्दा के
खिलाफ क्यों?
(20.1)
समाचारपत्रों
के
विज्ञापनों
के लिए
योगदान /
अंशदान, लेकिन
सीधे नकद दान /
चन्दा नहीं
(20.2)
समाचारपत्रों
के
विज्ञापनों
के लिए
योगदान /
अंशदान, लेकिन
सीधे नकद दान /
चन्दा नहीं
(20.3) सीधे
दान लेने और
अप्रत्यक्ष
रूप से
योगदान /
अंशदान करने
के बीच तुलना
(21.1) हमें
न्यायालयों
/ कोर्ट में
सुधार की
जरूरत क्यों
है?
(21.2) ऐसे
अन्यायपूर्ण
फैसलों का
समाज पर
प्रभाव
(21.3) न्यायालय
/ कोर्ट में और
सुधार की
राइट टू
रिकॉल ग्रुप /
प्रजा अधीन
राजा समूह की
मांग और वायदे
(21.4)
सुप्रीम
कोर्ट के
प्रधान जज को
बदलने का अधिकार
नागरिकों को
देना
(21.5) 1,00,000 (एक लाख) और
न्यायालयों
/ कोर्ट की स्थापना
करना
(21.6) निचली
अदालतों , हाई-कोर्ट
और
सुप्रीम-कोर्ट
में निष्ठा /
ईमानदारी की
कमी की समस्या
(21.7) जूरी
प्रणाली
(सिस्टम) के
बारे में
(21.8) जूरी
प्रणाली
(सिस्टम) और
सूचना-संबंधी
कारक
(21.9) सभी
राजनैतिक
दलों, बुद्धिजीवियों
की जूरी
प्रणाली
(सिस्टम) पर (राय
/ विचार)
(21.12) नागरिकगण
भारत में
जूरी प्रणाली
(सिस्टम) कैसे
ला सकते हैं?
(21.13) जजों
की नियुक्ति
/ भर्ती में
भाई-भतीजावाद
कम करना
(21.14) सारी
जनता को
कानून की
पढ़ाई पढ़ाना
और अन्य
परिवर्तनों
के बारे में
बताना
(21.15) कु-बुद्धिजीवी
लोग जजों में
भ्रष्टाचार
को समर्थन
देंगे
(21.16) न्यायालयों
/ कोर्ट में
सुधार करने
पर सभी दलों और
बुद्धिजीवियों
का रूख
अध्याय
22 - पुलिस
में सुधार
लाने के लिए
राइट टू
रिकॉल ग्रुप /
प्रजा अधीन
राजा समूह का
प्रस्ताव
(22.1) पुलिस
में सुधार के
लिए प्रस्तावित
परिवर्तन /
बदलाव
(22.2)
प्रस्तावित
प्रजा अधीन – जिला पुलिस
कमिश्नर
(22.4)
पुलिसवालों
पर प्रस्तावित
जूरी प्रणाली
(सिस्टम) का
विवरण
(22.6) सभी
दलों और
प्रमुख
बुद्धिजीवियों
की पुलिस में
सुधार करने
पर (राय)