094. राईट टू रिकाल और पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली के प्रक्रियाओं का सारांश

 

 प्रजा अधीन राजा के समर्थक मित्रों,

 

राईट टू रिकाल की प्रक्रियाओं का सारांश बना रहा हूँ दूसरों को बताने के लिए |

एक बार उन्होंने ये सारांश पढ़ लिया , तो उनको पूरा ड्राफ्ट पढ़ना चाहिए अपने संदेह दूर करने के लिए |

पूरे क़ानून-ड्राफ्ट के लिए, www.righttorecall.info/301.h.pdf के उचित चैप्टर देखें |

राईट टू रिकाल के प्रक्रियाओं और पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली पर अक्सर पूछे गए प्रश्नों के लिए कृपया www.righttorecall.info/004.h.pdf देखें | टी.सी.पी. और राईट टू रिकॉल के प्रश्नोत्तरी पर विडियो - https://www.youtube.com/user/TCPHindiFAQs में देखें |

 

1) भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध हमने निम्नलिखित कानून का प्रस्ताव रखा है जिससे हम निश्चित रूप से भ्रष्टाचार पर विजय पा लेंगे राईट टू रिकाल-प्रधानमंत्री

 

1. भारत का कोई भी नागरिक, जो 30 साल से ज्यादा हो, जिला कलेक्टर को एक सांसद के चुनाव के
बराबर भुगतान करके खुद को प्रधानमंत्री के लिए उम्मीदवार के रूप में रजिस्टर करवा सकता है
|

2. भारत का कोई भी नागरिक तलाटी ((लेखपाल, पटवारी, ग्राम अधिकारी) कार्यालय में जाकर मात्र 3 रुपये
शुल्क का भुगतान करके, लोकपाल अध्यक्ष पद के लिए अधिकतम पांच व्यक्तियों पर अनुमोदन या
स्वीकृति दे सकता है | तलाटी (लेखपाल, पटवारी, ग्राम अधिकारी) उस नागरिक का फोटो और अंगुली के
छाप लेगा और उसे रसीद देगा जिस पर उसका मतदाता-पहचान-संख्या और व्यक्तियों के नाम जिसे उसने
मंजूरी दी है लिखी होगी
| (सुरक्षित मेस्सेज सिस्टम आने पर ये खर्चा कुछ पैसे हो जायेगी)

3. नागरिक किसी भी दिन अपना अनुमोदन (स्वीकृति) रद्द कर सकता है |

4. वह पटवारी प्रधानमंत्री के वेबसाइट पर नागरिक के मतदाता-पहचान-पत्रसंख्या सहित उसके द्वारा चुने गए
व्यक्तियों के नाम डाल देगा |

5. हर महीने की पहली तारीख को, सचिव हर उम्मीदवार के अनुमोदनों (स्वीकृति) की गिनती प्रकाशित करेगा |

6. प्रधानमंत्री का अनुमोदन की गिनती इन दो विकल्पों में से जो अधिक होगी मानी जा सकती है

o नागरिकों की संख्या जिन्होंने उसको विकृति दी है

o लोकसभा सांसद जिन्होंने उसे समर्थन दिया है के वोटों की कुल जमा राशि

7. यदि किसी भी उम्मीदवार को 15 करोड़ मतदाताओं का अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्त हो जाता है और वर्त्तमान प्रधानमंत्री से एक करोड़ अनुमोदन अधिक मिलते हैं, तो मौजूदा प्रधानमंत्री इस्तीफा दे सकता है (या उसे ऐसा करने की जरूरत नहीं है) और सांसदों को सबसे ज्यादा अनुमोदन मिलने वाले प्रधानमंत्री उम्मीदवार को नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है | या सांसद सबसे ज्यादा अनुमोदन पाने वाले प्रधानमंत्री उम्मीदवार को भी नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकते हैं |

8. यदि कोई नागरिक इस कानून में परिवर्तन लाना चाह , तो वो हलफनामा/एफिडेविट जिला कलेक्टर के दफ्तर जाकर कर जमा कर सकता है और जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क हलफनामा/एफिडेविट को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा रु २० प्रति पन्ना लेकर |

9. यदि कोई भी नागरिक इस क़ानून या इसके कोई अंश का विरोध करना चाहे या उपरोक्त कलम में जमा हलफनामा/एफिडेविट पर अपनी हाँ/ना दर्ज करना चाहे और पटवारी के दफ्तर  ोटर पहचान पत्र  सहित जाता है और रु.3 शुल्क देता है तो पटवारी उसका हाँ/ना दर्ज करेगा और उसे रसीद देगा. नागरिक की हाँ/ना प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर दर्ज होगी |

 

भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध हमने निम्नलिखित कानून का प्रस्ताव रखा है जिससे हम निश्चित रूप से भ्रष्टाचार पर विजय पा लेंगे राईट टू रिकाल-लोकपाल

 

1. भारत का कोई भी नागरिक जिला कलेक्टर को एक सांसद के चुनाव के बराबर भुगतान करके खुद को
लोकपाल अध्यक्ष के लिए उम्मीदवार के रूप में रजिस्टर करवा सकता है |

2. भारत का कोई भी नागरिक तलाटी ((लेखपाल, पटवारी, ग्राम अधिकारी) कार्यालय में जाकर मात्र 3 रुपये
शुल्क का भुगतान करके, लोकपाल अध्यक्ष पद के लिए अधिकतम पांच व्यक्तियों पर अनुमोदन या
स्वीकृति दे सकता है | तलाटी (लेखपाल, पटवारी, ग्राम अधिकारी) उसे रसीद देगा जिस पर उसका
मतदाता-पहचान-संख्या, अंगुली के छाप और व्यक्तियों के नाम जिसे उसने मंजूरी दी है लिखी होगी |

3. नागरिक किसी भी दिन अपना अनुमोदन (स्वीकृति) रद्द कर सकता है |

4. वह पटवारी लोकपाल के वेबसाइट पर नागरिक के मतदाता-पहचान-पत्रसंख्या सहित उसके द्वारा चुने गए
व्यक्तियों के नाम डाल देगा |

5. यदि किसी भी उम्मीदवार को 24 करोड़ मतदाताओं का अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्त हो जाता है और वर्त्तमान
लोकपाल से
1 करोड़ अधिक अनुमोदन हो तो मौजूदा लोकपाल अध्यक्ष इस्तीफा दे सकता है (या उसे
ऐसा करने की जरूरत नहीं है) और लोकपाल अध्यक्ष के रूप में सबसे ज्यादा अनुमोदन के साथ व्यक्ति
को रख (नियुक्त) कर सकता है
|

ये प्रक्रियाएँ आम-नागरिकों द्वारा किसी ईमानदार सरकारी नौकर को पद पर बनाये रखने के लिए भी प्रयोग किये जा सकते हैं यदि वो किसी अफसर द्वारा गलत तरीके से निकाला गया था और एक बेईमान सरकारी नौकर को निकालने के लिए भी जनता इसका प्रयोग कर सकती है |

इसी तरह दूसरे पदों का क़ानून-ड्राफ्ट जो राष्ट्रिय/राज्य स्तर पर हैं जैसे प्रधान-मंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, रिसर्व बैंक गवर्नर , सुप्रीम कोर्ट जज, आदि होगा | केवल `लोकपाल` शब्द को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री आदि से बदल दें | और धारा नंबर 5 में दी गयी सीमा रेखा में अलग-अलग पद के अनुसार, में अंतर होगा और पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली के उपयोग से , बहुमत मतदाताओं के सहमति द्वारा अंतिम/फायनल होगी

2) भ्रष्ट सांसदों/विधायकों को बदलने के अधिकार के तरीके (राईट टू रिकाल-सांसद/विधायक/पार्षद)-

 

कुछ और धाराएं जुड़ जाएँगी राष्ट्री/राज्य स्तर के पदों के बदलने के अधिकार की प्रक्रिया में दी गयी धाराओं के साथ

 

6. यदि सांसद इस्तीफा दे देता है या निकाला जाता है, चुनाव आयोग नए चुनाव करवा सकती है, नियम
अनुसार | अगले चुनावों में, निकाला गया सांसद चुनाव लड़ सकता है |

7. पुराने चुनाव के बाद पंजीकृत/रजिस्टर मतदाताओं के अनुमोदन गिने नहीं जायेंगे रिकाल (हटाने) के सीमा
रेखा का विचार करते समय (जैसे की धारा 5 में बताया गया है )| मतदाताओं की संख्या का मतलब चुनाव
के दिन मतदाताओं की संख्या होगा | हर चुनाव क्षेत्र के मतदाताओं की सही संख्या चुनाव आयोग द्वारा
प्रकाशित की जायेगी और चुनाव आयोग का निर्णय अंतिम होगा |

3) जिले स्तर के पद के सरकारी नौकर जैसे जिला पोलिस कमिश्नर को बदलने के आम-नागरिक के अधिकार की प्रक्रिया -  

  राष्ट्रिय/राज्य स्तर के पदों के सरकारी नौकरों को आम-नागरिकों द्वारा बदले जाने वाले
प्रक्रियाओं के धाराओं में ये सुरक्षा धाराएं जोड़नी हैं , ताकि जातिवाद या कोई और पक्षपात
ना हो

6. राज्य के सारे नागरिक-मतदाताओं के 51% से अधिक अनुमोदन/स्वीकृति को पाने के
बाद, मुख्यमंत्री ये कानून को किसी जिले के लिए
4 साल के लिए रोक / निलंबित कर
सकता है और अपने पसंद का जिला पोलिस कमिश्नर को रख सकता है |
 

7. पूरे भारत के सारे नागरिक-मतदाताओं के 51% से अधिक अनुमोदन/स्वीकृति हों तो,
प्रधानमंत्री इस क़ानून को किसी राज्य में
4 साल तक रोक लगा सकता है और उस राज्य
के सारे जिलों में अपनी पसंद के जिला पोलिस कमिश्नर रख सकता है |
 

4) जिला शिक्षा अधिकारी, जला राशन अधिकारी आदि, के लिए विशेष तरक्की सम्बन्धी धारा-

8. कोई भी व्‍यक्‍ति नागरिक का अनुमोदन प्राप्‍त करके जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है,
वह एक से अधिक जिले का भी जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्‍य
में अधिक से अधिक 5 जिलों का और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का
जिला शिक्षा अधिकारी बन सकता है। कोई व्‍यक्‍ति अपने जीवन काल में किसी जिले का
जिला शिक्षा अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है।
यदि वह एक से अधिक जिले का जिला शिक्षा अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के
जिला शिक्षा अधिकारी के पद का वेतन
, भत्ता(महंगाई के लिए ज्यादा पैसा), बोनस आदि मिलेगा। 
5) जिला पोलिस कमिश्नर के आम नागरिकों के बदलने के अधिकार के प्रक्रियाओं के लिए विशेष व्यवस्था

 

हम आम-नागरिकों द्वारा किसी भी दिन अपने जिला पोलिस कमिश्नर को बदलने के अधिकार की प्रक्रियाओं को गुप्त मतदान द्वारा और जिले के कोई दूसरे चुनाव के साथ किया जाने का प्रस्ताव करते हैं जैसे जिला पंचायत, तहसील पंचायत, ग्राम पंचायत या पार्षद या अन्य जिला स्तर का चुनाव |

6) सीमा रेखाएं-

राईट टू रिकाल (बदलने के अधिकार) के प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी www.righttorecall.info/301.h.pdf के उचित चैप्टर में देखें |

7)   सम्पूर्ण `जनता की आवाज़`पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली (सिस्टम) ड्राफ्ट

[अधिकारी]                            

प्रक्रिया

1.   [कलेक्टर (और उसके क्लर्क)]      

कोई भी नागरिक मतदाता यदि खुद हाजिर होकर यदि अपनी सूचना अधिकार का आवेदन अर्जी या भ्रष्टाचार के खिलाफ फरियाद या कोई भी हलफ़नामा / एफिडेविट कलेक्टर को देता है तो कोई भी दलील दिये बिना कलेक्टर ( या उसका क्लर्क ) उस एफिडेविट को प्रति पेज 20 रूपये का लेकर सीरियल नंबर दे कर, एफिडेविट को स्कैन करके पधानमंत्री के वेबसाइट पर रखेगा।

2.    [पटवारी (तलाटी, लेखपाल) और उसका क्लर्क]

कोई भी नागरिक मतदाता यदि धारा-1 द्वारा दी गई अर्जी या फरियाद या हलफ़नामा / एफिडेविट पर आपनी हाँ या ना दर्ज कराने मतदाता कार्ड लेकर आये, 3 रुपये का शुल्क लेकर पटवारी नागरिक का मतदाता संख्या, नाम, फोटो, अंगुली के छाप, उसकी हाँ या ना को कंप्यूटर में दर्ज करेगा। नागरिक की हाँ या ना प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर आएगी। गरीबी रेखा नीचे के नागरिको से शुल्क 1 रूपये का होगा । बाद में, सुरक्षित मेसेज सिस्टम आने पर ये शुल्क पांच पैसे हो जायेगा |

सुरक्षा धारा (2A ; जिसके कारण ये प्रक्रिया पैसों से, गुंडों से या मीडिया द्वारा खरीदी नहीं जा सकती) - पटवारी नागरिक की हाँ या ना 3 रूपये देकर बदलेगा ।

3.         ----------------

ये कोई रेफेरेनडम/जनमत-संग्रह नहीं है | यह हाँ या ना अधिकारी, मंत्री, न्याधीश, सांसद, विधायक, आदि पर अनिवार्य नही होगी। लेकिन यदि भारत के 37 करोड़ नागरिक मतदाता कोई एक अर्जी, फरियाद पर हाँ दर्ज करे तो पधानमंत्री उस फरियाद, अर्जी पर ध्यान दे सकते हैं या इस्तीफा दे सकते हैं या उन्हें ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है । उनका निर्णय अंतिम होगा।

मांग किये गये इस `जनता की आवाज़` सरकारी हुक्म(राजपत्र अधिनियम) का सार है :-

1.      यदि नागरिक चाहे तो अपनी फरियाद 20 रूपये हर पेज देकर कलेक्टर की कचहरी जाकर पधानमंत्री के वेबसाइट पर रखवा सकेगा।

2.      यदि नागरिक चाहे तो 3 रुपये का शुल्क देकर फरियाद पर अपनी हाँ/ना पधानमंत्री वेबसाइट पर दर्ज करवा सकेगा।

3.      हाँ/ना पधानमंत्री पर अनिवार्य नहीं है।

ये पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) ये पक्का करेगा कि नागरिकों की शिकायत/प्रस्ताव हमेशा दृश्य है और जाँची जा सकती है कभी भी ,कहीं भी, किसी के भी द्वारा ताकि शिकायत को कोई नेत्ता, कोई बाबू(लोकपाल आदि) ,कोई जज या मीडिया न दबा सके | और सबूत हो और दब ना सके, इसके लिए प्रक्रिया बहुत जरुरी है |

इस प्रक्रिया के लागू होने से हरेक नागरिक एक रिपोर्टर बन सकता है और हरेक नागरिक एक प्रसारक | इसीलिए ये एक वैकल्पिक मीडिया होगा, जिसके द्वारा नागरिकों को मुफ्त, जाँची जा सकने वाली समाचार मिल सकता है |  

इससे लोगों के नौकरों आदि के सार्वजनिक कार्यों के बारे में भी पता चलेगा और इसकी मदद से कोई भी नागरिक निर्णय कर सकता है कि देश के लिए कौन सा व्यक्ति या कौन सी प्रक्रिया अच्छी या बुरी है |

कृपया पूरे क़ानून-ड्राफ्ट के लिए www.righttorecall.info/001.h.pdf में देखें | 

राईट टू रिकाल और पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए , www.righttorecall.info/004.h.pdf देखें |

 

8) लोकतान्त्रिक तरीके अपनाओ देश के लिए अच्छे प्रक्रियाएँ और देश में व्यवस्था परिवर्तन लाने के लिए --- विज्ञापन / पर्चे द्वारा समाधान क़ानून-ड्राफ्ट जन-समूह को बताने से शीग्र परिणाम आयेंगे

आज देश और आम-नागरिकों को तेज, अल्पकालिक, लोकतान्त्रिक समाधान चाहिए देश के ज्वलंत समस्याओं के लिए, कानून-प्रक्रियाएँ जन-समूह को बताने के अलावा जो असली जन-आन्दोलन के द्वारा लाये जा सकते हैं | कुछ असली, सफल जन-आन्दोलन 1977 का आपातकाल जन-आन्दोलन और भारतीय नौसेना विद्रोह, 1946 हैं | हमें कम से कम 2-4 लाख कार्यकर्ता चाहिए, जो अच्छे समाधान कानून-ड्राफ्ट प्रक्रियाओं का महीने में 15-20 घंटा प्रचार करें और कुछ करोड़ आम-नागरिक चाहिए, देश और व्यवस्था में कोई सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए |

देश के ज्वलंत समस्याओं के लिए सबसे अच्छा अल्पकालिक राहत है जन-समूह को कानून-ड्राफ्ट समाधान विज्ञापन / पर्चों द्वारा बताना | उसके साथ, हम मिस-काल सिस्टम भी रख सकते हैं, जहाँ लोग अपना समर्थन दर्ज कर सकते हैं |

ये लोकतान्त्रिक तरीके हैं देश के लिए अच्छे प्रक्रियाएँ लाने के लिए , जो सफल होंगी यदि कार्यकर्ता इसमें भाग लें तो | गैर-लोकतान्त्रिक तरीके जैसे अपने प्रिय नेता के नारे लगाना, भाषणबाजी , बंद दरवाजों के पीछे चर्चा, किसी नेता के लिए चुनावी प्रचार करना, अनशन, मोमबत्ती रैली, आदि., से देश और व्यवस्था में कोई भी सकारात्मक परिवर्तन नहीं आएगा

इन तरीकों में जनसमूह सक्रीय रूप से शामिल होता है, जो देश में बराबर के हिस्सेदार और इसीलिए ये लोकतान्त्रिक तरीके शक्तिशाली और सफल होते हैं | दूसरी ओर, वो तरीके जिनके द्वारा जनसमूह नहीं, कुछ ही लोग सक्रीय रूप से शामिल होते हैं, वे कमजोर और गर-लोकतान्त्रिक हैं और व्यवस्था में कोई सकारात्मक परिवर्तन लाने में विफल हो जाते हैं |

ये जन-हित कानून-प्रक्रियाएँ भारतीय राजपत्र में डाली जाएँगी उससे पहले ही, जब जन-समूह को देश के ज्वलंत समस्याओं के समाधान क़ानून-प्रक्रियाओं के बारे में पता चलेगा जैसे पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली, राईट टू रिकाल-प्रधानमंत्री, राईट टू रिकाल-जज, राईट टू रिकाल-पोलिस अध्यक्ष, आदि , नेता, जज, पोलिस डरेंगे कि अब लोगों को इन प्रक्रियाओं के बारे में पता चल गया है और अब यदि उन्होंने अपना काम सही से नहीं किया, तो करोड़ों लोग इन प्रक्रियाओं की मांग करेंगे, जिससे जनता की राय नहीं दबेगी और आम-नागरिक भ्रष्ट को बदल सकते हैं, सज़ा दे सकते हैं |

दूसरे शब्दों में, इन कानून-प्रक्रियाओं के आने का डर भी प्रभावशाली है और जनता के नौकरों को सुधर जाने के लिए मजबूर करेगा |